लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर | आर.एन. सांवरिया
जयपुर। नववर्ष 2026 के पहले दिन गुरुवार को सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 में उत्साह, उमंग और उल्लास चरम पर दिखाई दिया। वर्ष की पहली सुबह से ही मेला परिसर आगंतुकों से गुलजार रहा। रंग-बिरंगे स्टॉल, हस्तशिल्प की खुशबू, लोकसंगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया।
एसएचजी दीदियों की शानदार बिक्री
मेले में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) दीदियों ने रिकॉर्ड बिक्री कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।
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भरतपुर की जय शिव शंकर एसएचजी अब तक सबसे आगे रही। समूह की दीदी नीलम ने बताया कि उनके जूट उत्पादों को ग्राहकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।
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बाड़मेर की दिनुवानी एसएचजी बिक्री में दूसरे स्थान पर रही, जिनके कशीदाकारी उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने।
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बाड़मेर की ही जोगमाया एसएचजी द्वारा बनाए गए अजरक प्रिंट वस्त्रों की भी रिकॉर्ड बिक्री हुई। समूह सदस्य गंगादेवी ने इसके लिए राजीविका के मंच का आभार जताया।
फूड स्टॉल्स में भी रही धूम
फूड स्टॉल्स में जयपुर की राधास्वामी एसएचजी की पाव भाजी सबसे ज्यादा पसंद की गई। वहीं सवाई माधोपुर की सरस्वती एसएचजी के पारंपरिक व्यंजनों ने भी आगंतुकों को खूब लुभाया।
आत्मनिर्भरता का मंच बना सरस मेला
एसएचजी दीदियों के चेहरों पर दिखती मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि सरस मेला उनके लिए केवल बाजार नहीं, बल्कि सपनों को साकार करने का मंच है। कई स्टॉल्स पर ग्राहक दोबारा लौटकर खरीदारी करते नजर आए, जिससे उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिली।
आंध्र प्रदेश से आई एक एसएचजी दीदी ने बताया कि यह उनका पहला राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा, “यहां लोगों की सराहना से आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है।”
वहीं हरियाणा की एक एसएचजी सदस्य ने बताया कि उनके हैंडलूम उत्पादों की मांग इतनी अधिक है कि स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई।
आगंतुकों का उत्साह भी चरम पर
मेले में आए दर्शकों का उत्साह भी कम नहीं रहा।
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जयपुर की गृहिणी कविता ने कहा कि एक ही स्थान पर देशभर के उत्पाद देखना और खरीदना अनोखा अनुभव है।
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अजमेर से आए कॉलेज छात्र राहुल ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को बेहद प्रभावशाली बताया।
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मुंबई से आई विदेशी पर्यटक सारा ने भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों की जमकर सराहना की।
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युवाओं के लिए स्टाइलिश बैग्स, पर्स, विंटर वियर और सिल्क स्टोल्स आकर्षण का केंद्र बने।
कई आगंतुकों ने बताया कि सांस्कृतिक संध्याओं और लाइव प्रस्तुतियों के कारण वे बार-बार मेला देखने आ रहे हैं।
संस्कृति और आत्मनिर्भरता का संगम
इन सभी अनुभवों से स्पष्ट है कि सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और भारत की सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने वाला एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बनकर उभरा है।