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“बिजली कर्मियों के संघर्ष पर विवादित बयान — मंत्री के बयान से कर्मचारियों में रोष”
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जालौर। नए सबडिवीजन उद्घाटन कार्यक्रम में बिजली विभाग के कार्मिकों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन — जिसमें ट्रांसफर पॉलिसी जल्दी लागू करने की मांग की गई थी — पर प्रतिक्रिया स्वरूप मंत्री के.के. विश्नोई द्वारा दिए गए बयान ने कई विवादों को जन्म दे दिया है। मंत्री ने कहा कि “अभी जयपुर और अजमेर डिस्कॉम आ गये हैं फायदे में, इसलिए मैं सीएम साहब को सलाह दे सकता हूँ कि जोधपुर डिस्कॉम को बाहर वालों की वजह से घाटे में ले जाओ, उन्हें वहीं फेंक दो” जैसी टिप्पणी की गई है।
मंत्री के इस बयान ने कई प्रश्न उठाए हैं और विभागीय कर्मियों में भारी आक्रोश को जन्म दिया है।
1. घाटे का कारण केवल कर्मी?
मंत्रीजी ने यह संकेत दिया है कि घाटे की मुख्य वजह “बाहर वालों” की नियुक्ति है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्कॉम के घाटे के पीछे कई अन्य गंभीर कारण होते हैं — जैसे तकनीकी क्षति (T&D losses), बिल वसूली की कमी, उपकरण एवं नेटवर्क की असमर्थता, अनियंत्रित खपत, समय पर मेंटेनेंस न हो पाना आदि।
2. ट्रांसफर पॉलिसी की मांग और उसका अधिकार
विभागीय कर्मचारी समान रूप से यह मांग कर सकते हैं कि उनकी पोस्टिंग व ट्रांसफर नीति पारदर्शी और निष्पक्ष हो। यह उनके कार्य की स्वायत्तता और न्याय की दिशा में एक संवैधानिक एवं संवेदनशील मुद्दा हो सकता है।
3. सस्पेंशन जैसी धमकी
मंत्री के बयान में सुझाव दिया गया कि “इन्हें वहीं फेंक दो / सस्पेंड कर दो” — यह कर्मियों की संवैधानिक गरिमा और मौलिक अधिकारों के प्रति असम्मान का भाव उत्पन्न करता है।
4. कर्मचारियों की ईमानदारी और समर्पण पर सवाल
बिजली वितरण सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का समर्पण और कठिनाई भरी परिस्थितियों में योगदान अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
मंत्री बयान पर माफी मांगे
इस तरह के बयान उनके सम्मान और मनोबल को प्रभावित कर सकते हैं। मंत्री के इस विवादित बयान ने बिजली के कर्मियों की संवैधानिक गरिमा, उनके कार्य प्रयास और विभागीय न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और विभाग को चाहिए कि वे इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएँ, कर्मचारियों की मांगों पर विचार करें और किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी से बचें।
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