लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
(रिपोर्ट: पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा)
भीलवाड़ा। पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू ने आरोप लगाया कि बजरी खनन लीजधारक ने अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया है। पौधे लगाने के बजाय पेड़ों की कटाई की गई, जिससे पर्यावरण संरक्षण कानून का गंभीर हनन हुआ है।
उन्होंने कहा कि बिना प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी घटना संभव नहीं है। जाजू ने मांग की कि संबंधित लीजधारक की खनन लीज तत्काल निरस्त की जाए और उस पर 51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। साथ ही नए अनुबंध के तहत पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।
अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग
जाजू ने यह भी कहा कि विभागीय अधिकारियों की मौन सहमति के बिना 70 पेड़ों की कटाई संभव नहीं है। उन्होंने दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन को काटे गए पेड़ों की समान प्रजाति के पौधे लगाकर भरपाई करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि लीज रद्द नहीं की जाती है तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के माध्यम से पौधे लगाने और सुरक्षा कार्य शुरू करवाए जाएं।
ग्रामीणों की भी शिकायतें अनसुनी रहीं
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार पेड़ों की कटाई की शिकायतें कीं, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषियों को सजा देने और नदी क्षेत्र को फिर से हरियाली से आच्छादित करने की मांग की है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
चांदगढ़ में पेड़ कटाई का यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी किस तरह प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुँचा रही है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाता है या नहीं, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
