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कोलूखेड़ी कला से गुराडी चौराहे तक सड़क बदहाल, बारिश से पहले ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

गड्ढों में सड़क या सड़क में गड्ढे?

पूर्व विधायक के गांव की सड़क बनी मुसीबत, छात्र-छात्राओं, किसानों, मरीजों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी
झालावाड़। जिले की कोलूखेड़ी कला ग्राम पंचायत मुख्यालय से गुराडी चौराहे तक जाने वाला सड़क मार्ग इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर हर राहगीर एक ही सवाल पूछ रहा है—”गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढे?” वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रही यह सड़क अब लोगों के लिए परेशानी ही नहीं, बल्कि खतरे का कारण भी बन चुकी है।
क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुका है। सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान हैं, जबकि चारपहिया वाहन भी हिचकोले खाते हुए गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मौन बना हुआ है।
पीपलोदी सहित दर्जनों गांवों की जीवनरेखा
यह सड़क केवल कोलूखेड़ी कला तक सीमित नहीं है, बल्कि पीपलोदी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से छात्र-छात्राएं विद्यालय पहुंचते हैं, किसान अपनी फसल लेकर मंडियों तक जाते हैं और ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण हर वर्ग प्रभावित हो रहा है।
25 साल विधायक रहने वाले नेता के गांव की बदहाल तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव स्वर्गीय पूर्व विधायक जगन्नाथ वर्मा का गांव रहा है, जिन्होंने करीब 25 वर्षों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बावजूद आज गांव की मुख्य सड़क अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यह सड़क हकीकत बयां कर रही है।
मानसून से पहले बढ़ी चिंता
मानसून की दस्तक कभी भी हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अभी सड़क पर गहरे गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बारिश शुरू होने के बाद इनमें पानी भर जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाएगा। ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं और मरीजों के लिए बनी परेशानी
समाजसेवी कैलाश शर्मा ने बताया कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यदि किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना पड़े तो रास्ते में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मरीजों और बुजुर्गों को भी इस मार्ग से गुजरने में भारी दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद स्थिति और विकट हो जाएगी, इसलिए प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
“डबल इंजन सरकार में सड़क गड्ढे में है या गड्ढे सड़क में”
समाजसेवी रामचंद्र मेरोठा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि समझ नहीं आता कि डबल इंजन सरकार में सड़क गड्ढों में है या गड्ढे सड़क में। उन्होंने कहा कि यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है, लेकिन इसकी बदहाली विकास के दावों की पोल खोल रही है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
ललित शर्मा ने बताया कि ग्रामीण कई बार लिखित शिकायतें जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत मुख्यालय तक जाने वाली सड़क अपनी बदहाली पर स्वयं आंसू बहा रही है। यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो बारिश के दौरान लोगों का निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
विधायक और विभाग पर उपेक्षा के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के वर्तमान विधायक गोविंद रानीपुरिया तथा संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई बार मांग उठने और शिकायतें करने के बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का सवाल
“क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? आखिर दर्जनों गांवों की जीवनरेखा बनी इस सड़क की सुध कब ली जाएगी?”
प्रमुख बिंदु
कोलूखेड़ी कला से गुराडी चौराहे तक सड़क पूरी तरह जर्जर।
जगह-जगह बने गहरे गड्ढों से दुर्घटना का खतरा।
पीपलोदी सहित दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग।
छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और मरीज प्रभावित।
गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना भी जोखिम भरा।
कई बार शिकायतों के बावजूद नहीं हुई मरम्मत।
मानसून से पहले सड़क सुधार की मांग तेज।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले सड़क का पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए, ताकि हजारों ग्रामीणों को राहत मिल सके और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव हो सके। उनका कहना है कि यह केवल सड़क नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है, जिसकी अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

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