किसानों के लिए ऐतिहासिक तोहफ़ा—खर्च घटेगा, लाभ बढ़ेगा”

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क -हेमराज तिवारी

भारत की रीढ़ किसान हैं। लेकिन विडंबना यह है कि कृषि क्षेत्र का योगदान GDP में लगभग 18% है, जबकि किसान परिवारों की मासिक औसत आय मात्र ₹10,218 (NSO, 2022-23) है। खेती की लागत लगातार बढ़ने से किसान की स्थिति और दयनीय हो रही थी।

ऐसे समय में 56वीं GST काउंसिल ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब ट्रैक्टर, कृषि यंत्र, बायो-कीटनाशक और सिंचाई उपकरण पर GST घटाकर सिर्फ़ 5% कर दिया गया है।

पहले और अब – टैक्स दरों की तुलना

वस्तु / उपकरण पहले GST (%) अब GST (%) औसत कीमत (₹) प्रति किसान औसत बचत (₹)

ट्रैक्टर (6–8 लाख ₹) 12–18% 5% 7,00,000 50,000 – 90,000
पावर टिलर / कृषि यंत्र 12% 5% 1,50,000 10,000 – 12,000
ड्रिप / स्प्रिंकलर सिस्टम 12% 5% 50,000 7,000 – 8,000
बायो-कीटनाशक (1 बोतल 500₹) 12% 5% 500 35 – 40 (प्रति बोतल)

(नोट: बचत अनुमान औसत कीमत और पूर्व कर दरों पर आधारित हैं।)

किसानों को सीधा लाभ

खेती की लागत में 8–10% कमी – कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) के अनुसार गेहूँ, धान जैसी फसलों की लागत का 30–35% हिस्सा मशीनरी, कीटनाशक और सिंचाई पर आता है। GST घटने से इसमें औसतन 8–10% राहत मिलेगी। कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन – अभी देश में केवल 45% खेती यंत्रीकृत है, जबकि चीन में यह दर 65% और अमेरिका में 95% है। नई रियायत से यह अंतर घटेगा। जैविक खेती का विस्तार – महंगे होने के कारण बायो-कीटनाशक की हिस्सेदारी कुल उपयोग में 12% ही है। कीमत घटने से यह हिस्सेदारी बढ़ सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उछाल – प्रति किसान औसतन ₹60,000–1 लाख की वार्षिक बचत से ग्रामीण बाजारों में अतिरिक्त क्रयशक्ति आएगी।

व्यापक प्रभाव

उत्पादन और खाद्य सुरक्षा – कम लागत का मतलब अधिक उत्पादन। इससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत – कृषि उपकरणों और बायो-उत्पादों की मांग बढ़ने से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन मिलेगा।

किसान आत्महत्या पर नियंत्रण – राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 रिपोर्ट के अनुसार हर साल औसतन 10–12 हजार किसान आत्महत्या करते हैं, जिनका बड़ा कारण आर्थिक बोझ है। यह राहत इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकती है।

चुनौतियाँ

क्या कंपनियाँ और डीलर यह लाभ सचमुच किसानों तक पहुँचाएँगे?

छोटे किसान (2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले) महंगे यंत्रों को खरीदने में सक्षम होंगे या नहीं?

क्या राज्यों की सरकारें इस कदम के साथ सबसिडी और आसान ऋण योजनाएँ भी जोड़ेंगी?

यह टैक्स कटौती केवल संख्यात्मक राहत नहीं बल्कि किसानों की दशकों पुरानी माँग का समाधान है।
यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह कृषि क्रांति 2.0 की नींव बन सकती है—जहाँ किसान की ज़िंदगी बोझ से नहीं, अवसर से परिभाषित होगी।

“जब किसान की लागत घटेगी, तभी खेतों में सोना लहलहाएगा।
और जब अन्नदाता मुस्कुराएगा, तभी भारत सच्चे अर्थों में सम्पन्न बनेगा।”

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