लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
वास्तविक माल और बिलों में दर्ज मात्रा में अंतर मिलने पर वाहन जब्त, परिवहनकर्ताओं और कारोबारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया) राज्य में माल परिवहन के दौरान बिल और ई-वे बिल में कम मात्रा दर्शाकर वास्तविकता में अधिक माल ले जाने के मामलों पर वाणिज्यिक कर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की प्रवर्तन टीमों ने पिछले तीन सप्ताह में ऐसे 44 वाहन पकड़े, जिनमें परिवहन किए जा रहे माल की वास्तविक मात्रा संबंधित बिलों और ई-वे बिल में दर्ज मात्रा से अधिक पाई गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में दस्तावेजों में कम मात्रा दर्शाकर वास्तविक रूप से अधिक माल का परिवहन किया जा रहा था। विभाग के अनुसार, इस तरह की अनियमितता के जरिए वास्तविक बिक्री को कम दर्शाकर कर देयता घटाने का प्रयास किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में नियमानुसार वाहनों को जब्त कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जाडिया ट्रांसपोर्ट के 6 और उदयपुर गोल्डन के 4 वाहन पकड़े
पिछले तीन सप्ताह के दौरान हुई कार्रवाई में Jadia/Jadiya Transport के 6 वाहन, Udaipur Golden के 4 वाहन और Kriya Shakti के 3 वाहन पकड़े गए।
इसके अलावा Om Shiv Transport, Jain Super Cargo Movers, Vikas Travels (Bhilwara), Pooja Road Carriers, TFC, Srinath और New Bhartiya Transport के दो-दो वाहन भी ऐसी अनियमितताओं में पकड़े गए।
वहीं Kohitoor, Sanwariya, Giriraj, SK Transport, GC Carrier, Balaji Transport, Shekhawati Transport, U Trans Logistic, Vikas Cargo, Nawrang Cargo, Gill Sandhu, Super Fast Cargo और Malani Transport के एक-एक वाहन कार्रवाई की जद में आए।
वाहनों को रोककर किया माल का भौतिक सत्यापन
वाणिज्यिक कर विभाग की प्रवर्तन टीमें राज्यभर में विभिन्न स्थानों पर माल परिवहन करने वाले वाहनों की जांच कर रही हैं। जांच के दौरान वाहनों को रोककर उनमें लदे माल का भौतिक सत्यापन किया गया। इसके बाद वास्तविक मात्रा का मिलान संबंधित बिल और ई-वे बिल में दर्ज विवरण से किया गया।
जिन मामलों में दस्तावेजों में दर्ज मात्रा और वास्तविक माल की मात्रा में अंतर पाया गया, वहां नियमानुसार वाहनों को जब्त कर संबंधित प्रकरणों में आगे की कार्रवाई शुरू की गई है। जांच के दौरान संबंधित व्यापारी के साथ-साथ परिवहन से जुड़े अन्य पक्षों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा जा रहा है।
महज दस्तावेजी गलती नहीं, कर चोरी की संभावना की जांच
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिल में कम मात्रा दर्शाकर अधिक माल का परिवहन केवल दस्तावेजी अनियमितता मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि यह जानबूझकर किया गया है तो इससे माल की वास्तविक बिक्री और उससे उत्पन्न कर देयता को छिपाने की संभावना पैदा होती है।
इसी को देखते हुए विभाग द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, वास्तविक माल, परिवहन विवरण और संबंधित लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।
ईमानदार कारोबारियों के हितों की रक्षा पर जोर
वाणिज्यिक कर विभाग ने कहा है कि राज्य में बिल में कम मात्रा दर्शाकर माल परिवहन, आवश्यक ई-वे बिल के बिना माल परिवहन तथा कर चोरी के अन्य तरीकों के खिलाफ निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
विभाग का उद्देश्य कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ नियमों का पालन कर कारोबार करने वाले करदाताओं के हितों की रक्षा करना है। विभाग के अनुसार, ईमानदारी से कर अनुपालन करने वाले व्यवसायों को अनियमित कारोबारियों के कारण अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रवर्तन गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
वाणिज्यिक कर विभाग की प्रवर्तन टीमें राज्यभर में माल परिवहन की जांच लगातार कर रही हैं और कर चोरी की किसी भी संभावना पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
