लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अतिवृष्टि से खराब फसलों के मुआवजे की मांग, तहसीलदार को सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
जोधपुर (झंवर)। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले जिलाध्यक्ष भंवरलाल सांई के नेतृत्व में शुक्रवार को किसानों ने झंवर तहसील परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों ने 2023 और 2024 में अतिवृष्टि से खराब हुई खरीफ एवं रबी फसलों के बीमा क्लेम और मुआवजे की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

बीमा कंपनियों की मनमानी और सरकारी उदासीनता पर जताई नाराजगी
जिलाध्यक्ष भंवरलाल सांई ने कहा कि बीमा कंपनियों की मनमानी और सरकार की उदासीनता से किसान परेशान हैं।
उन्होंने बताया कि लूणी विधानसभा क्षेत्र और जोधपुर जिले के कई हिस्सों में भारी वर्षा से खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं।
मूंग की फसल पानी में डूबने से काली पड़ गई, जिससे मंडियों में उसकी कीमत ₹3,000 प्रति क्विंटल से भी कम रह गई।
इसी तरह, बाजरे के दाने भी काले पड़ गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसानों की मुख्य मांगे
ज्ञापन में किसानों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगे रखीं —
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 की खरीफ एवं रबी फसलों के नुकसान का पूरा मुआवजा किसानों को दिलाया जाए।
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क्रॉप कटिंग प्रक्रिया की अनियमितताओं की जांच की जाए। किसानों ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनी के ऑपरेटर ग्राम पंचायत स्तर पर फसल कटाई प्रयोग के फॉर्म (नं. 1, 2, 3) भरने और हस्ताक्षर कराने की औपचारिकता पूरी नहीं करते हैं।
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जोजरी नदी के केमिकल युक्त पानी से प्रभावित जोधपुर, लूणी और बाड़मेर क्षेत्र के किसानों को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए।
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राज्य सरकार द्वारा घोषित आदान-अनुदान की अधूरी राशि सभी किसानों के खातों में पूरी तरह जमा की जाए।
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ग्राम पंचायत स्तर पर लघु और सीमांत किसानों की सूची में अनियमितताओं को दूर किया जाए और पुनः सुधार किया जाए।

बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन में श्रवणराम पटेल (खुड़ला), मूसे खान (सरपंच हिगोला), लतीफ खान, इंदु खान, हीराराम पटेल (नारणाड़ी), शेराराम पटेल (डोली), भल्लाराम मुंडन (सरपंच), प्रह्लादराम सुथार (चिचरली), श्रवणसिंह सिसोदिया, सुखाराम, राजवीर पटेल, राकेश चौधरी, विक्रम चौधरी, और ओमाराम साई सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों ने कहा — “न्याय न मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष”
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि फसलों के नुकसान का वास्तविक आकलन कर, किसानों को समय पर राहत राशि दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।
















































