लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सिस्टम करता रहा इंतजार
जयपुर । जगतपुरा फ्लाईओवर से आगे शुक्रवार शाम एक तेज रफ्तार काली थार ने सड़क पार कर रही दो विवाहिता महिलाओं को ऐसी टक्कर मारी कि दोनों परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं। हादसे में सुगना बैरवा और सुनीता बैरवा की दर्दनाक मौत हो गई।
यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि लापरवाह रफ्तार, बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और संवेदनहीन सिस्टम की एक ऐसी कहानी बन गया, जिसने दो घरों को मातम में डुबो दिया।
सड़क पार करते हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुक्रवार शाम करीब 5 बजे दोनों महिलाएं रेलवे कॉलोनी से जगतपुरा की ओर पैदल जा रही थीं। जैसे ही वे फ्लाईओवर से आगे नीचे सड़क पार करने लगीं, अक्षय पात्र की तरफ से तेज गति में आई काली थार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि दोनों महिलाएं कई फीट दूर जा गिरीं।
बताया जा रहा है कि थार का पहिया सुगना की पसलियों के ऊपर से गुजर गया। गंभीर अंदरूनी चोटों और अत्यधिक ब्लीडिंग के कारण उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत दोनों को बीएल अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें Apex Hospital रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों ने दोनों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन रात करीब 9 बजे सुनीता ने दम तोड़ दिया। इसके कुछ देर बाद करीब पौने दस बजे सुगना की भी मौत हो गई।
“मेरी दुनिया उजड़ गई…” — पति जगदीश की आंखों में सिर्फ आंसू
सुगना के पति जगदीश बैरवा की आवाज अब टूट चुकी है। वे बार-बार सिर्फ एक ही बात कह रहे हैं —
“मेरी दुनिया उजड़ गई… मेरे तीन बच्चे अचानक अनाथ हो गए… मेरा सबकुछ खत्म हो गया…”
जगदीश ने बताया कि कुछ समय पहले ही बेटे की सगाई हुई थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। शुक्रवार को बड़े भाई के घर शादी की चर्चा करने के बाद सुगना और उनकी पड़ोसी व सहेली सुनीता पैदल घर लौट रही थीं।
जगदीश ने उन्हें साथ चलने को कहा भी था, लेकिन दोनों ने कहा — “घर तो पास ही है, पैदल आ जाएंगे…”
कुछ देर बाद एक फोन आया और खुशियों से भरा घर चीखों से गूंज उठा।
अस्पतालों के चक्कर और एम्बुलेंस चालक की बेरुखी
परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद दोनों महिलाओं को अस्पताल से अस्पताल भटकाया गया। पहले बीएल अस्पताल, फिर एपेक्स अस्पताल और जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें एसएमएस अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई।
लेकिन आरोप है कि एम्बुलेंस चालक ने “नियमों” का हवाला देते हुए एसएमएस ले जाने से मना कर दिया। बाद में दोनों को जयपुरिया अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गंभीर हालत में मरीजों के साथ यह संवेदनहीनता क्यों हुई? क्या समय रहते बेहतर इलाज मिलता तो दो जिंदगियां बच सकती थीं?
“हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए”
सुगना के पति जगदीश और सुनीता के पति ओमप्रकाश बैरवा दोनों ही प्रशासन और पुलिस से नाराज हैं। उनका कहना है कि यह महज एक्सीडेंट नहीं, बल्कि रफ्तार की लापरवाही से हुई हत्या है।
परिजनों ने आरोपी चालक के खिलाफ हत्या और हिट एंड रन का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
ओमप्रकाश बैरवा ने कहा कि उनकी बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अब घर में सिर्फ मातम बचा है।
साथ जिया, साथ विदा हुईं दोनों सहेलियां
सुगना और सुनीता सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि बेहद करीबी सहेलियां थीं। दोनों हर सुख-दुख में साथ रहती थीं। शायद यही वजह रही कि मौत ने भी उन्हें अलग नहीं किया।
दोनों की शवयात्रा साथ निकाली गई। मनोहरपुर श्मशान घाट में दोनों का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया। अब परिजनों ने फैसला किया है कि दोनों की अस्थियों का विसर्जन भी हरिद्वार में साथ ही किया जाएगा।
परिजनों की आंखों में सिर्फ एक सवाल है —
“आखिर हमारी खुशियों को किसकी नजर लग गई?”
अभी तक थार और थार चालक का पता नहीं
अभी तक जयपुर पुलिस को दुर्घटना करने वाली काली थार के बारे में कोई सुराग नहीं लगा है । पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया है लेकिन अभी तक घटनास्थल का मौका मुआयना नहीं किया है। मृतकों के परिजनों का कहना है कि अब हम लोग आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालेंगे और सीसीटीवी फुटेज पुलिस थाने उपलब्ध कराएंगे उसके बाद पुलिस वाले इसकी तलाश करेंगे जबकि यह ड्यूटी पुलिस की बनती है लेकिन पुलिस ने अभी तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था और तेज रफ्तार वाहनों पर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- आखिर फ्लाईओवर के नीचे सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?
- वहां पैदल राहगीरों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग क्यों नहीं है?
- तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
- हादसे के बाद गोल्डन ऑवर में इलाज और एम्बुलेंस व्यवस्था इतनी लाचार क्यों दिखी?
दो परिवार उजड़ गए, बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया, लेकिन अब भी आरोपी थार चालक पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
यह हादसा सिर्फ दो महिलाओं की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की असफलता की कहानी है जो हर हादसे के बाद सिर्फ जांच का आश्वासन देता है।