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पश्चिमी राजस्थान में गहराया जल संकट

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जोधपुर संभाग के 43 में से 18 बांध सूखे, केवल 19 प्रतिशत पानी शेष

जोधपुर। (नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता राजस्थान) पश्चिमी राजस्थान में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट भी गंभीर होता जा रहा है। मॉनसून आने में अभी करीब डेढ़ महीने का समय बाकी है, लेकिन जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। जल संसाधन विभाग राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर संभाग के 43 प्रमुख बांधों में से 18 पूरी तरह खाली हो चुके हैं, जबकि कई अन्य बांध डेड स्टोरेज स्तर तक पहुंच गए हैं।

वर्तमान में पूरे संभाग के बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 19.37 प्रतिशत पानी ही बचा है।

जोधपुर और जालौर में सबसे खराब स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर और जालौर जिले में हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं। दोनों जिलों के अधिकांश बांध पूरी तरह सूख चुके हैं।

सुरपुरा बांध पूरी तरह खाली हो चुका है और उसके कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। लगातार कम बारिश और तेज गर्मी के कारण जल स्तर तेजी से घटा है, जिससे आने वाले समय में पेयजल आपूर्ति बड़ी चुनौती बन सकती है।

प्रमुख बांधों की मौजूदा स्थिति

जोधपुर संभाग के 43 बांधों की कुल जल भराव क्षमता 544.642 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि वर्तमान में केवल 105.479 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी शेष है।

प्रमुख बांधों में उपलब्ध पानी:

  • जवाई बांध : 37.24% पानी शेष
  • सरदारसमंद बांध : 44.29% पानी उपलब्ध
  • हेमावास बांध : केवल 27.24% पानी बचा

पूरी तरह सूखे बांध:

  • जसवंत सागर
  • सुरपुरा
  • बिलासपुर
  • जालीवाड़ा

इन बांधों में पानी का स्तर शून्य हो चुका है।

पेयजल व्यवस्था बड़े बांधों पर निर्भर

फिलहाल संभाग की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से जवाई बांध, सरदारसमंद, वेस्ट बनास और हेमावास जैसे बड़े जलाशयों पर निर्भर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून समय पर नहीं पहुंचा या सामान्य से कम बारिश हुई तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

राजस्थान प्रशासन ने संभावित संकट को देखते हुए वैकल्पिक जल स्रोतों और जल प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी और आपूर्ति प्रबंधन किया जा रहा है।

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