लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
इस महीने तय होगा भारत की स्पेस-टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम
बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इस महीने फिर से अपने री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV) बूस्टर का महत्वपूर्ण परीक्षण करने जा रहा है। यह टेस्ट भारत की भविष्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने और कम लागत में लॉन्च सिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह परीक्षण RLV प्रोग्राम के तहत किया जा रहा है, जो भारत के Reusable Spaceplane और Reusable Booster सिस्टम बनाने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।
क्या है ISRO का RLV बूस्टर प्रोग्राम?
RLV तकनीक का मकसद ऐसे लॉन्च व्हीकल विकसित करना है जो:
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एक बार इस्तेमाल होने की बजाय बार-बार उपयोग किए जा सकें,
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सैटेलाइट लॉन्च की लागत कई गुना कम कर सकें,
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और भारत को वैश्विक लॉन्च मार्केट में प्रतिस्पर्धी बना सकें।
ISRO पहले भी कई सफल परीक्षण कर चुका है—
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RLV-LEX (Landing Experiment)
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RLV-HEX
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RLV-REX
इन परीक्षणों ने RLV को ऊंचाई से गिराए जाने, ऑटो-लैंडिंग और बूस्टर फंक्शनिंग की तकनीक को साबित किया है।
इस महीने का परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
इस बार ISRO बूस्टर की:
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लैंडिंग क्षमता,
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ऑटोमेटिक नेविगेशन,
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री-एंट्री कंट्रोल,
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और थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम
का मूल्यांकन करेगा।
यह परीक्षण यह भी तय करेगा कि भारत पूरी तरह री-यूजेबल लॉन्च सिस्टम बनाने के कितने करीब पहुंच गया है।
लॉन्च कॉस्ट कम करने का लक्ष्य
फ़िलहाल दुनिया में स्पेसएक्स ही पूर्णतः री-यूजेबल बूस्टर (Falcon 9) को ऑपरेट करती है। ISRO का लक्ष्य है कि भारत भी आगामी वर्षों में:
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भारी सैटेलाइट्स को कम लागत पर लॉन्च कर सके
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वैश्विक व्यावसायिक लॉन्च मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ा सके
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मानव अंतरिक्ष मिशनों में सुरक्षा एवं विश्वसनीयता बढ़ा सके
RLV तकनीक ऐसा कर पाने की कुंजी मानी जा रही है।
भारत की स्पेस-टेक क्षमता होगी और मजबूत
इस परीक्षण की सफलता के बाद भारत—
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Gaganyaan,
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भविष्य के स्पेस स्टेशन,
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चंद्र और मंगल मिशनों,
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और कमर्शियल लॉन्च सर्विसेज
के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग कर सकेगा।