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हनुमान बेनीवाल भरतपुर जाटआरक्षण की लड़ाई संसद में लड़ेंगे

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

भरतपुर के जाटों ने सौंपी आरक्षण की कमान बेनीवाल को
सासंद संजना जाटव पर भी जताया भरोसा

भरतपुर जाट आरक्षण की लड़ाई अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। भरतपुर, डीग और धौलपुर के जाट समाज ने अपनी आरक्षण की मांग को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल को सौंप दी है। भरतपुर में आयोजित महापंचायत के दौरान जाट समाज के प्रतिनिधियों ने बेनीवाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अब इस लड़ाई को संसद तक पहुंचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं की है। बेनीवाल ने भी मंच से भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे पर पीएम मोदी से मिलेंगे और जरुरत पड़ी तो संसद में धरना भी देंगे।

 

सांसद संजना जाटव भी रहेगी साथ,संसद में भी दे सकते है धरना
कई सालों से जाट आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे जाट समाज ने हुंकार रैली में जुड़ी भीड़ के बीच जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता नेम सिंह फौजदार ने जाट सरदारी से चर्चा करके अब आरक्षण की लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी सांसद हनुमान बेनीवाल को सौंप दी है। नेमी सिंह फौजदार ने कहा कि हमारी आरक्षण की लड़ाई स्टेट गर्वमेंट से नहीं है क्योंकि यहां से तो पूर्व सीएम अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और भजनलाल शर्मा ने सकारात्मक चिट्टी दिल्ली भेज दी है। लेकिन दिल्ली में हमारा कोई मजबूत पैरोकार नहीं है इसलिए हम ये ज्ञापन बेनीवाल जी को सौंप रहे है । अब ये जिम्मेदारी बेनीवाल जी की है वो इस लड़ाई को संसद में लड़े. नेमसिंह फौजदार ने भी कहा कि बेनीवाल के साथ इस लड़ाई में स्थानीय सांसद संजना जाटव पूरी तरह से साथ रहेगी उन्होंने दो बार संसद में ये मुद्दा पहले भी उठाया था… अब आगे भी आपके साथ रहेगी। इस पर बेनीवाल ने ज्ञापन लेते हुए कहा कि जाट समाज के हक की लड़ाई लड़ने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते है। जाट समाज को आरक्षण का फैसला पीएम मोदी और अमित शाह ही कर सकते है. मैं इन दोनों से बात करुंगा और जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को पीएम से मिलवाऊंगा। जरुरत पड़ने पर वे संसद में धरना भी देंगे। लेकिन जाट समाज को केंद्र में आरक्षण मिले इसके लिए संघर्ष करेंगे।

धरना- प्रदर्शन से भी नहीं चूकेंगे

महापंचायत में बेनीवाल ने भी जाट समाज को भरोसा दिलाया कि वे इस आंदोलन को सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहने देंगे, बल्कि संसद के भीतर भी पूरी ताकत से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे संसद परिसर में धरना देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था कि यह सामाजिक न्याय का मुद्दा है और भरतपुर, डीग तथा धौलपुर के जाटों को आरक्षण से वंचित रखना उचित नहीं है।

बेनीवाल ने कहा कि जाट समाज जमीन और सड़क पर आंदोलन करेगा तो वे संसद और राजनीतिक मंचों पर उसकी आवाज बनेंगे। उन्होंने समाज से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि आरक्षण की इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि सांसद संजना जाटव ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाया है और उम्मीद है कि आगे भी वे इस लड़ाई में सहयोग करेंगी। महापंचायत में मौजूद लोगों ने बेनीवाल के समर्थन में जोरदार नारे लगाए और आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया।

जाट समाज की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब आरक्षण की लड़ाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली और संसद के गलियारों तक पहुंचाई जाएगी। वहीं बेनीवाल की सक्रियता ने इस आंदोलन को नया राजनीतिक बल दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है। देखना ये है कि हनुमान बेनीवाल मानसून सत्र में जाट आरक्षण का मुद्दा संसद में उठाते है या नहीं ….. क्योंकि संसद में इस मु्द्दे को उठाकर सदन का ध्यान आकर्षित करना बड़ी बात है। क्या इस मुद्दे पर बेनीवाल का साथ समाज के दूसरे सांसद भी सदन में देते है या नहीं क्योंकि राजस्थान से जाट समाज के कांग्रेस और बीजेपी के 6-7 सांसद है हरियाणा- पंजाब और दिल्ली की बात करे तो इनकी संख्या काफी ज्यादा है यदि सभी सांसद इस मुद्दे को सदन में उठाए तो ये मामला एक दिन में हल हो सकता है।

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