लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रायपुर , छत्तीसगढ़ ।(प्रदीप कुमार डागा)
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ क्षेत्र के डॉ. अखिल जैन गौसेवा, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर राष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं। मनोहर गौशाला के माध्यम से उन्होंने प्राकृतिक खेती को एक जनआंदोलन का रूप दिया है।
हजारों किसानों को जोड़ा प्राकृतिक खेती से
डॉ. जैन के प्रयासों से देशभर के हजारों किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। उनके विकसित किए गए मॉडल की चर्चा अब विदेशों तक हो रही है।
उन्होंने गोमूत्र आधारित उर्वरक “फसल अमृत” और गोबर से बनी जैविक खाद का बड़े स्तर पर वितरण किया, जिससे किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने में मदद मिली।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. अखिल जैन को उनके कार्यों के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं—
- अमेरिकन पेस यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट
- भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय से ‘प्राणी मित्र अवॉर्ड’
- अहिंसा क्षेत्र में ‘यति यतनलाल सम्मान’
- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से ‘उन्नत कृषक सम्मान’
पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल
मनोहर गौशाला में पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
- तालाब निर्माण
- मिनी फॉरेस्ट विकसित करना
- गौ आधारित उत्पादों का निर्माण
यहां ‘चंद्रमणि गौ माता चिकित्सालय’ का निर्माण भी जारी है, जो पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर कृषि मॉडल की ओर बढ़ता कदम
डॉ. जैन के मॉडल से बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उनका उद्देश्य कृषि को रसायन मुक्त बनाकर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
गौसेवा और प्राकृतिक खेती को जोड़कर डॉ. अखिल जैन एक ऐसे मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
