लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ढोल-ढमाकों के साथ ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ से गूंजा नगर; जन्म दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने खोले उपवास
गंगधार (झालावाड़)। प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर गंगधार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। छोटी कालीसिंध नदी के तट पर स्थित मंदिरों सहित विभिन्न मोहल्लों के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर दिनभर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा।
रात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, मंदिरों में ढोल-ढमाकों और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘आलकी की पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठे। तेज बारिश और हवा के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
बारिश के बीच जमकर हुई आतिशबाजी
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर मंदिर परिसरों के बाहर और गिरते पानी के बीच जमकर आतिशबाजी की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के जन्म दर्शन के लिए आतुर नजर आए। जन्म दर्शन और आरती के बाद श्रद्धालुओं को पंजेरी का प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद महिलाओं और पुरुषों ने अपना उपवास खोला।
जन्माष्टमी को लेकर पूरे नगर में धार्मिक उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालु देर रात तक भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते रहे।
गायत्री परिवार ने किया वृक्षारोपण
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गायत्री शक्ति पीठ परिवार चौमहला की ओर से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। गायत्री शक्ति पीठ परिवार के सदस्यों ने नंदी गौशाला कुंडला और गुरु महाराज समाधि, ग्राम दल की रुंडी में पौधारोपण किया।
इस अवसर पर गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य ट्रस्टी गोविंद जी अग्रवाल, वरिष्ठ परिजन भोलानाथ चतुर्वेदी, गौशाला प्रबंधक, कुंडला ग्राम पंचायत के सरपंच, पड़ालिया प्रज्ञा मंडल के सदस्य तथा गायत्री परिवार चौमहला के सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से जन्माष्टमी पर्व पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन का संदेश भी दिया गया।