लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
वचनबद्धता की जीत, IAS बनने से पहले हुआ था रिश्ता तय, पद मिलने के बाद भी निभाया पुराना वादा
IAS अफसर बनकर भी नहीं भूले जड़ें, सादगी के साथ शादी बनी मिसाल
मनोहरसिंह खोखर।
जयपुर. राजस्थान के बालोतरा जिले के निवासी और नवचयनित IAS अधिकारी जितेंद्र कुमार प्रजापत ने हाल ही में अपने गांव और समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह कर एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। IAS जैसे उच्च पद पर चयनित होने के बावजूद, जितेंद्र कुमार ने आधुनिक तामझाम और फिजूलखर्ची के बजाय अपने समाज की प्राचीन परंपराओं और संस्कारों को प्राथमिकता दी। उनकी इस पहल को युवा पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। विवाह की रस्में पूरी तरह से गांव और समाज के पारंपरिक कायदे-कानूनों के अनुसार निभाई गईं, जिसमें किसी भी प्रकार के आधुनिक दिखावे से दूरी बनाए रखी गई। उन्होंने अपनी सफलता के बाद किसी बड़े या अमीर घर के रिश्ते को चुनने के बजाय, अपने समाज और पुराने संबंधों को तवज्जो दी। पेश है नवचयनित IAS अधिकारी जितेंद्र कुमार प्रजापत की सादगी से परिपूर्ण शादी पर खास रिपोर्ट…
सादगी से दिया युवा पीढ़ी को सकारात्मक सन्देश :
यह बात बिल्कुल सच है और भारतीय समाज की एक कड़वी हकीकत भी है। जैसे ही कोई अभ्यर्थी IAS या IPS बनता है, तो समाज और रसूखदार परिवारों में उनकी “डिमांड” अचानक बढ़ जाती है। इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण होते हैं। कई रसूखदार परिवार चाहते हैं कि उनका दामाद एक उच्च पदस्थ अधिकारी हो, ताकि समाज में उनका मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ सके। आईएएस की नौकरी को भारत में सबसे सुरक्षित और सम्मानित करियर माना जाता है, इसलिए माता-पिता अपनी बेटी के लिए इसे सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं।
पुराने रिश्ते को दी तवज्जो:
IAS जितेंद्र कुमार प्रजापत का कदम इसलिए भी एक बड़ी मिसाल बना क्योंकि उन्होंने सफलता मिलने के बाद भी सादगी और वचनबद्धता को प्राथमिकता दी। उनके इस फैसले ने उन “रिश्तों की कतारों” को एक कड़ा संदेश दिया है जो केवल पद और प्रतिष्ठा देखकर आगे आते हैं।
उनके इस कदम के मिसाल बनने के कई कारण है। जितेंद्र कुमार का विवाह 21 अप्रैल 2026 को बालोतरा जिले के मोकलसर के पास बावड़ी निवासी एक युवती के साथ हुआ। सूत्रों के अनुसार उनका विवाह 2 साल पहले ही होना था, लेकिन उन्होंने आईएएस बनने के बाद ही शादी करने का निर्णय लिया था। उन्होंने सफलता के बाद अमीर घरानों के प्रस्तावों के बजाय अपने पुराने वादे को निभाया।
रिश्तों की कतार और करोड़ो के दहेज़ को किनारा :
आईएएस जैसे पद पर चयन के बाद समाज में करोड़ों के दहेज की जो अघोषित परंपरा सी बन गई है, उसे दरकिनार कर उन्होंने पूरी तरह से पारंपरिक और सादगीपूर्ण तरीके से शादी की। जितेंद्र कुमार ने यह सफलता अपने 9वें और अंतिम प्रयास में हासिल की। इतने लंबे संघर्ष के बाद जब इंसान को इतनी बड़ी सफलता मिलती है, तो अक्सर वह दिखावे की ओर भागता है, लेकिन उन्होंने अपनी मिट्टी और समाज के रीति-रिवाजों को चुना। लोग प्रशासनिक पद की ताकत और “पहुंच” की वजह से भी ऐसे रिश्तों के पीछे भागते हैं। जिस “रिश्तों की कतार” और “करोड़ों के दहेज” की आप बात कर रहे हैं, उसी के बीच जितेन्द्र कुमार का कदम मिसाल बना। अक्सर इस ‘कतार’ में वो लोग होते हैं जो भारी दहेज का लालच देते हैं। सादगी से शादी कर उन्होंने इस लालच को ठुकरा दिया।
पद की गरिमा के साथ जड़ों से जुड़ाव :
बालोतरा निवासी जितेंद्र ने यह साबित किया कि पद की गरिमा और समाज के संस्कार साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने आधुनिक चमक-धमक के बजाय अपने गांव की संस्कृति को महत्व दिया। उन्होंने साबित किया कि IAS की कुर्सी दफ्तर के लिए है, परिवार और समाज के लिए वह आज भी वही “गांव के बेटे” हैं। यही कारण है कि लोग उनकी तुलना उन लोगों से कर रहे हैं जो पद मिलते ही अपनी जड़ें बदल लेते हैं। यह खबर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही है, जहाँ लोग इस “पावर कपल” की सादगी और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की सराहना कर रहे हैं। यह संदेश देता है कि उच्च पद या सफलता प्राप्त करने का अर्थ अपनी जड़ें और संस्कृति छोड़ना नहीं है। आधुनिकता के बीच अपनी परंपराओं का पालन करना ही असली गरिमा है।
दिखावे और फिजूलखर्ची पर प्रहार :
आज के दौर में जहाँ शादियों में करोड़ों रुपये बर्बाद किए जाते हैं, वहाँ एक आईएएस अधिकारी का सादगी चुनना समाज को ‘फिजूलखर्ची’ कम करने के लिए प्रेरित करता है। वह युवाओं को सिखाते हैं कि सफलता का मतलब केवल पैसा या रसूख नहीं, बल्कि अपने समाज और संस्कारों के प्रति जवाबदेही भी है। जब एक प्रतिष्ठित व्यक्ति सादगी से शादी करता है, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से दहेज और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश होता है। यह दर्शाता है कि पद की प्रतिष्ठा अपनी जगह है, लेकिन समाज के बीच आप अभी भी उसी रीति-रिवाज का हिस्सा हैं जिससे आपका पालन-पोषण हुआ है।
पहले आईएएस क्लियर, अब नैतिकता की परीक्षा में भी ‘टॉप’ :
IAS जितेंद्र कुमार प्रजापत का यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में भागते समाज के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि प्रशासनिक सेवा (UPSC) जैसी सर्वोच्च उपलब्धि हासिल करने के बाद भी एक व्यक्ति अपनी जड़ों, संस्कारों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकता है। उनकी यह सादगीपूर्ण शादी दहेज लोभियों और दिखावे की संस्कृति पर एक मूक प्रहार है। वास्तव में जितेंद्र कुमार ने न केवल परीक्षा पास की है, बल्कि अपनी नैतिकता की परीक्षा में भी ‘टॉप’ किया है।