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देवनानी का मुख्यमंत्री बनने की अतिमहत्वाकांक्षा और विधानसभा अध्यक्ष पद की गरिमा!

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

नीरज मेहरा

राजस्थान की राजनीति में विधानसभा अध्यक्ष का पद हमेशा तटस्थता, मर्यादा और गरिमा का प्रतीक माना गया है। यह परंपरा रही है कि अध्यक्ष दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरे सदन को निष्पक्षता से संचालित करे। लेकिन मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को लेकर हाल ही में जो चर्चाएँ तेज़ हुई हैं, वे इस परंपरा को धुंधला करती दिख रही हैं। विपक्ष लगातार उन पर भेदभाव करने का आरोप लगाता रहा है, कई बार सदन में ऐसे हालात देखे गए हैं जब उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है। इस बीच उनके अति महत्वाकांक्षी होने  और दिल्ली में लगातार केंद्रीय नेताओं के चक्कर लगाने को लेकर उन पर सवालिया निशान उठने लगे हैं कि कहीं वह राजस्थान की मौजूदा राजनीति में मौके की तलाश में तो नहीं है? दिल्ली के केंद्रीय नेताओं ने भी यह बात कहना शुरू कर दिया की अध्यक्ष जी मुख्यमंत्री जी का सपना देखने लगे है। उन्हें लगता है जैसे भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने हैं वैसे ही उनकी भी लॉटरी लग सकती है!

केंद्रीय नेताओं के चक्कर लगाना हफ्ते में एक बार दिल्ली का दौरा

मुख्यमंत्री जी का दिल्ली जाना मंत्रियों का दिल्ली जाना सबके समझ में आता है क्योंकि सरकार में सभी अलग-अलग विभागों के काम दिल्ली केंद्र सरकार के माध्यम से होते हैं लेकिन इस बीच राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी गाय भगाए बगैर किसी काम के ही दिल्ली में केंद्रीय नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाते नजर आते हैं जो अब सबको साफ तौर पर नजर आने लगा है।

देवनानी की सक्रियता और बार-बार दिल्ली के चक्कर अब केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं मानी जा रहीं। सत्ता गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि वे मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं और उसके लिए माहौल बनाने में जुटे हैं। राजनीति में महत्वाकांक्षा कोई दोष नहीं, लेकिन जब यह अति महत्वाकांक्षा का रूप ले ले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

विपक्ष ने कई बार उनकी निष्पक्षता पर उठाए सवाल

सदन के संचालन में विपक्ष कई बार देवनानी पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगा चुका है। यह स्थिति विधानसभा अध्यक्ष जैसे पद की गरिमा पर आंच डालती है। सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी समय-समय पर उनकी कार्यशैली से असहमति जताते रहे हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या देवनानी सचमुच तटस्थ अध्यक्ष की भूमिका निभा पा रहे हैं, या फिर उनकी नज़र मुख्यमंत्री पद पर अधिक टिकी हुई है?

राजस्थान में कई नेता देख रहे हैं मुख्यमंत्री बनने का सपना!

राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री पद का सपना लगभग कई  नेता देख रहे  है, मंत्री या मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना कोई बुरी बात में नहीं है, परंतु विधानसभा अध्यक्ष से उम्मीद की जाती है कि वे इस दौड़ से स्वयं को अलग रखें। लेकिन देवनानी के मामले में यह तस्वीर उलटी दिखाई देती है। जयपुर से दिल्ली तक, और अजमेर से लेकर सत्ता के गलियारों तक, चर्चा का यही विषय है कि क्या उनकी “लॉटरी” कभी खुल सकती है। अब तू भी कई बार हंसी मजाक में इस बात को बोल भी देते हैं न जाने कब लॉटरी लग जाए!

अब तो दिल्ली के नेताओं ने भी कहना शुरू कर दिया

कभी किताब विमोचन का बहाना, तो कभी क्या बहाना, किसी ने किसी बहाने से केंद्रीय नेताओं के चक्कर लगाने के चलते अब तक केंद्रीय नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया कि वाकई में देवनानी जी बड़ा सपना देख रहे हैं । जब दिल्ली से यह आवाज राजस्थान तक पहुंच रही है तो जाहिर सी बात है कि कहीं ना कहीं मन में लड्डू जरूर फूट रहे है ।

सवाल यह नहीं कि कोई महत्वाकांक्षी क्यों है, सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते विधानसभा की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक परंपराएँ दांव पर लगनी चाहिएं। यही बिंदु आज सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

 

 

 

 

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