लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
करीब 40 मामलों में कार्रवाई को मंजूरी
लैंगिक उत्पीड़न मामले में कॉलेज प्राचार्य बर्खास्त, प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष भी सेवा से हटेंगे; 5 मामलों में ACB जांच को मंजूरी
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच तथा विभागीय कार्रवाई से जुड़े करीब 40 प्रकरणों में निर्णय किए हैं।
लैंगिक उत्पीड़न मामले में प्राचार्य बर्खास्त
राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के लैंगिक उत्पीड़न के मामले में मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कॉलेज प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। मामले में सहयोग करने वाले एक प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की मंजूरी दी गई है।
6 मामलों में अभियोजन स्वीकृति
भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने से जुड़े 6 गंभीर प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता और विकास अधिकारी से जुड़े मामले शामिल हैं।
भ्रष्ट सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर भी कार्रवाई
सेवा काल में अनुशासनहीनता, दुराचरण और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में 10 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया है। इनमें 5 मामलों में शत-प्रतिशत पेंशन रोकने की मंजूरी दी गई है। एक मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद पूरी पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया, जबकि अन्य मामलों में विभागीय जांच पूरी होने तक पेंशन रोकने की कार्रवाई की गई।
5 मामलों में ACB को जांच की अनुमति
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के लिए 5 प्रकरणों में एसीबी को आगे की कार्रवाई की अनुमति दी गई है। इसके अलावा राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत 6 मामलों में संबंधित अधिकारियों की वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का फैसला किया गया।
विभागीय मामलों में भी कार्रवाई
सीसीए नियम 17 के तहत दो मामलों में अधिकारियों को परिनिंदा का दंड दिया गया। वहीं नियम 23 के तहत दो रिव्यू याचिकाओं में वेतन वृद्धि रोकने के दंड को परिनिंदा में बदलने की मंजूरी दी गई।
सीसीए नियम 34 के तहत दाखिल चार रिव्यू याचिकाएं खारिज कर दंडादेश बरकरार रखे गए हैं। इन मामलों की अभिशंसा राज्यपाल को भेजी गई है। वहीं विभागीय जांच के चार मामलों को समाप्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को दोषमुक्त करने की राहत भी दी गई।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इन फैसलों से सरकार ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और कार्यस्थल पर गंभीर कदाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया है। सरकार का कहना है कि पारदर्शी और स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष, कठोर और समयबद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
