लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर में सर्वदलित समाज का प्रदर्शन
शहीद स्मारक पर जुटे प्रदेशभर के लोग, दोबारा जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग
जयपुर। नागौर के डांगावास में करीब 11 वर्ष पहले हुई पांच दलित लोगों की हत्या के मामले में अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किए जाने के बाद दलित समाज में आक्रोश है। इसी के विरोध में बुधवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर सर्वदलित समाज की ओर से बड़ा धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का आयोजन डॉ. अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी सहित विभिन्न दलित सामाजिक संगठनों की ओर से किया गया।

प्रदेश भर से बड़ी संख्या में पहुंच दलित समाज
धरने में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पीड़ित परिवारों के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मामले की दोबारा जांच कराने और पांच दलित लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत सजा दिलाने की मांग उठाई।
‘11 साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल—पांच लोगों की हत्या किसने की?’
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकरण में तत्कालीन पुलिस ने करीब 40 लोगों को गिरफ्तार किया था और बाद में जांच सीबीआई तक पहुंची। लेकिन लंबे समय तक चले न्यायिक घटनाक्रम के बाद अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं होने के कारण सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
पुलिस में अदालत में नहीं रखे सबूत
दलित समाज का कहना है कि यदि अदालत के सामने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं रखे जा सके और सभी आरोपी बरी हो गए, तो अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन पांच लोगों की हत्या किसने की? समाज ने सरकार से इस सवाल का जवाब तलाशने और वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के लिए निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच की मांग की है।
सीबीआई जांच पर भी उठाए सवाल
धरने को संबोधित करने वाले नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सीबीआई की जांच में हत्या के आरोपों को अदालत में साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
धरना अपराधियों के खिलाफ किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं
वक्ताओं ने कहा कि पांच दलित लोगों की मौत के मामले में न्याय केवल आरोपियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक अपराधियों की पहचान और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना भी जरूरी है।
सतवीर सिंह, डीसी बैरवा और राजेंद्र सिंह गुढ़ा समेत कई नेताओं ने किया संबोधित
शहीद स्मारक पर आयोजित धरने को डॉ. अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष सतवीर सिंह, विधायक डीसी बैरवा, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, रवि मेघवाल, गिगराज जोड़ली, राजस्थान विश्वविद्यालय की पूर्व अध्यक्ष पूजा वर्मा सहित कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
धरने को संबोधित करते हुए सोसाइटी के अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस सत्यवीर सिंह ने कहा कि डांगावास की भयावह घटना में पांच लोगों की हत्या हुई और अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पीड़ित परिवार करीब ग्यारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सभी 40 अभियुक्तों के बरी होने के फैसले से पीड़ित परिवारों और समाज में गहरा आक्रोश एवं निराशा पैदा होना स्वाभाविक है।
सत्यवीर सिंह ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति हमारा पूरा सम्मान है, लेकिन कानून द्वारा उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अधिकार है। सरकार को चाहिए कि फैसले के विरुद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रभावी अपील दायर कराए और मामले की मजबूत एवं निष्पक्ष पैरवी सुनिश्चित करे। ज्ञापन में भी हाईकोर्ट में तत्काल अपील, अनुभवी विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति तथा प्रभावी पैरवी की मांग की गई है।
सोसाइटी के उपाध्यक्ष आर.पी. बैरवा ने भी धरने को संबोधित करते हुए कहा कि डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक और वैधानिक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से जिस तरह 36 कौम के लोग इस आंदोलन के समर्थन में आए हैं, वह सामाजिक एकजुटता और इंसानियत की ताकत का प्रमाण है।
धरने को दौसा विधायक डी.सी. बैरवा, पिलानी विधायक पितराम काला, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा, पूर्व विधायक पूरन सैनी खेतड़ी, जय नारायण शेर, श्रीराम चोरड़िया, बी.एल. बैरवा, टेकचंद राहुल, जे.पी. विमल, रवि मेघवाल, राकेश जॉय, गीगराज जोड़ली, महेंद्र खंडेलवाल, भंवर लाल सांभरिया एवं विनोद वर्मा रलावता सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
36 कौम की भागीदारी ने यह संदेश दिया लड़ाई जाति विशेष से नहीं है
वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से लोग अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। 36 कौम की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि न्याय की लड़ाई किसी एक जाति या समुदाय की लड़ाई नहीं होती। जब किसी परिवार के साथ अन्याय होता है तो इंसानियत का तकाजा है कि समाज उसके साथ खड़ा हो।
धरने के बाद प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से विशेष न्यायालय के फैसले के विरुद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में तत्काल वैधानिक अपील दायर कराने, पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता एवं सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी जाति या समाज विशेष के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य केवल उन पांच लोगों की हत्या के वास्तविक दोषियों को सामने लाना और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना है।
सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन
धरने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में डांगावास प्रकरण की फिर से जांच कराने, मामले के तथ्यों और साक्ष्यों की नए सिरे से समीक्षा करने तथा पांच दलित लोगों की हत्या के वास्तविक दोषियों को चिन्हित कर उन्हें कानून के मुताबिक सजा दिलाने की मांग की गई।
ज्ञापन में पीड़ित परिवारों और महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा का तत्काल पुलिस स्तर पर ऑडिट कराने तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई, ताकि किसी प्रकार का भय, दबाव या धमकी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 11 वर्ष बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवारों के मन में न्याय को लेकर सवाल कायम हैं। ऐसे में सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन
जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में भी दलित समाज और सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने जिला मुख्यालयों पर पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे और डांगावास प्रकरण में न्याय की मांग उठाई।
‘न्याय तभी पूरा होगा, जब असली हत्यारे सामने आएंगे’
डांगावास प्रकरण को लेकर आंदोलनकारियों का कहना है कि अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए भी यह सवाल अपनी जगह कायम है कि पांच लोगों की जान आखिर किसने ली। समाज की मांग है कि किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन यदि पांच लोगों की हत्या हुई है तो उसके वास्तविक जिम्मेदारों का पता लगाना भी शासन और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
सरकार कराए उच्च स्तरीय जांच
सर्वदलित समाज ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष तरीके से दोबारा जांच कराई जाए और पांच लोगों की हत्या के वास्तविक दोषियों को सामने लाकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाए।
पीड़ित परिवार के यह सदस्य भी रहे मौजूद
धरने में डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवारों की ओर से गोविंद मेघवाल, मोहन मेघवाल, धन्नाराम मेड़ता और बगड़ाराम मेड़ता भी शामिल हुए। वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों की मौजूदगी ने धरने को भावनात्मक और गंभीर स्वरूप दिया।
मानवीय संवेदना और संवैधानिक अधिकारों का मामला
वक्ताओं ने कहा कि डांगावास प्रकरण केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं है, बल्कि यह न्याय, मानवीय संवेदना, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। करीब ग्यारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के दर्द को समझते हुए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।धरने में उमड़े हजारों लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि डांगावास के पीड़ित परिवार अकेले नहीं हैं। राजस्थान का समाज उनके साथ खड़ा है और न्याय की इस वैधानिक लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।