लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राकेश शर्मा पादुकंला-
रियांबड़ी, नागौर- रियांबड़ी क्षेत्र के दासावास गांव की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां मिड-डे मील के समय, जब बच्चों को आराम और भोजन का अधिकार होना चाहिए, वहां नजारा बिल्कुल उल्टा देखने को मिला।
बच्चों ने किया चौंकाने वाला खुलासा
स्कूल के कक्षा कक्ष के भीतर 4 शिक्षक आराम फरमाते हुए सोते नजर आए, जबकि दूसरी ओर छोटे-छोटे बच्चे भारी स्टील के बर्तन उठाकर इधर-उधर ले जाते दिखे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फड़ौदा खुद कुर्सी पर बैठकर यह सब देखते रहे, लेकिन उन्होंने बच्चों को रोकने या शिक्षकों को टोकने की कोई कोशिश नहीं की। बच्चों ने खुलासा किया कि उनसे यह काम रोजाना करवाया जाता है, यानी यह कोई एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि एक नियमित व्यवस्था बन चुकी है। स्कूल में कुल 8 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से 7 उस समय मौजूद थे, इसके बावजूद जिम्मेदारी का बोझ बच्चों पर डाल दिया गया।
प्रधानाध्यापक ने दिया बेतूका बयान
जब इस पूरे मामले पर प्रधानाध्यापक से सवाल किया गया तो उन्होंने गंभीरता दिखाने के बजाय हल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब दिया। उनका कहना था, ‘बच्चों के बर्तन तो बच्चों को ही उठाने पड़ेंगे, शिक्षक थोड़ी ना उठाएंगे।’ इतना ही नहीं, उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, ‘आप कहें तो आदेश निकाल दूंगा, कल से शिक्षक ही बर्तन उठा लेंगे।’ प्रधानाध्यापक का यह बयान अब पूरे मामले को और अधिक विवादित बना रहा है और उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिला प्रशासन का क्या कहना है?
मामले को लेकर एसडीएम सूर्यकांत शर्मा ने स्पष्ट कहा कि शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि जांच में बच्चों से नियमित काम करवाना और शिक्षकों की लापरवाही सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। वहीं बाल कल्याण समिति, नागौर के अध्यक्ष मनोज सोनी ने भी कहा कि मामला संज्ञान में लिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामलों पर जिला स्तर पर चर्चा भी होगी।















































