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सिरोही में फिर भड़का जनआक्रोश
रिपोर्ट: तुषार पुरोहित, सिरोही
लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सिरोही।सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित चुना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार देर रात वाटेरा गांव में ग्रामीणों ने मशालों के साथ जन आक्रोश रैली निकालते हुए जोरदार नारेबाजी की — “धरती नहीं बिकने देंगे, खनन परियोजना करनी होगी रद्द” के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।
जानकारी के अनुसार, मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, जयपुर द्वारा करीब 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर चुना पत्थर खनन की परियोजना प्रस्तावित की गई है, जो चार ग्राम पंचायतों — वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा — के लगभग 11 गांवों को प्रभावित करेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना उनके खेत-खलिहान, जंगल, जलस्रोत और देवस्थानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी है।
थम्ब बाबा मंदिर में हुई निर्णायक बैठक
गुरुवार शाम वाटेरा के प्रसिद्ध थम्ब बाबा मंदिर परिसर में ग्रामवासियों की बड़ी बैठक हुई, जिसमें महिलाओं, युवाओं, किसानों और बुजुर्गों ने भारी संख्या में भाग लिया।
वक्ताओं ने कहा — “यह लड़ाई अब सिर्फ वाटेरा की नहीं, पूरे अरावली अंचल की अस्मिता की लड़ाई है। हम अपनी जमीन नहीं बेचेंगे, अपनी धरती नहीं खोदने देंगे। यह संघर्ष जल, जंगल और जीवन की रक्षा के लिए है।”
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाली 14 अक्टूबर (मंगलवार) को पिण्डवाड़ा उपखंड कार्यालय (SDM Office) का ऐतिहासिक महाघेराव किया जाएगा। इस दिन हजारों ग्रामीण, किसान, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि एकजुट होकर सरकार से परियोजना रद्द करने की मांग करेंगे।
ग्रामीणों की चेतावनी — नहीं माना प्रशासन तो होगा उग्र आंदोलन
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
“जरूरत पड़ी तो जयपुर और दिल्ली तक रैली निकाली जाएगी। सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेंगे,” ग्रामीणों ने चेतावनी दी।
भारजा में भी ग्रामीण एकजुट, महिलाओं ने संभाला मोर्चा
वाटेरा के साथ-साथ भारजा गांव में भी गुरुवार को बड़ी बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में रणनीति बनाई और आसपास के गांवों में जनजागरण अभियान चलाने का फैसला लिया।
महिलाओं ने भी आंदोलन की कमान संभाल ली है। उनका कहना है — “अपने बच्चों के भविष्य और धरती मां की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।”
जनजागरण की नई लहर
पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में रैलियों, सभाओं और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। ग्रामीण बैनर-पोस्टर बनाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, वहीं युवा सोशल मीडिया पर #धरती_बचाओ_आंदोलन के नाम से डिजिटल मुहिम चला रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना — यह सिर्फ खनन नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है
ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना न केवल खेती, जलस्तर और पर्यावरण संतुलन को खत्म कर देगी, बल्कि वन्यजीवों और देवस्थलों के अस्तित्व को भी मिटा देगी।
“खनन से हमें रोजगार नहीं, उजाड़ मिलेगा,” ग्रामीणों ने कहा।
अब सबकी निगाहें 14 अक्टूबर पर
ग्रामीणों का कहना है कि 14 अक्टूबर का दिन निर्णायक होगा, जब पिण्डवाड़ा SDM कार्यालय के बाहर हजारों लोग जुटकर सरकार से एक ही मांग करेंगे —
“खनन परियोजना को तुरंत निरस्त किया जाए!”
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