लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मेयर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित, भाजपा-कांग्रेस के कई नेताओं को तलाशना होगा नया वार्ड
भरतपुर। निकाय चुनाव 2026 से पहले भरतपुर नगर निगम की वार्ड आरक्षण लॉटरी ने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। आरक्षण की नई व्यवस्था के बाद कई दिग्गज नेताओं के चुनावी समीकरण बिगड़ गए हैं। कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल देखने को मिल रहा है।
सबसे ज्यादा असर मेयर पद की राजनीति पर पड़ा है। इस बार भरतपुर नगर निगम का मेयर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने से भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय खेमे के डेढ़ दर्जन से अधिक दावेदारों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
मेयर और डिप्टी मेयर को तलाशना होगा नया रास्ता
वार्ड आरक्षण के बाद वर्तमान मेयर अभिजीत कुमार और डिप्टी मेयर गिरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं को नए राजनीतिक विकल्प तलाशने होंगे। अब चुनावी मैदान में उनकी पत्नियों या अन्य महिला परिजनों को उतारने की रणनीति पर भी मंथन शुरू हो गया है।
कांग्रेस के कई नेताओं के समीकरण प्रभावित
आरक्षण के बाद कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं के वार्ड प्रभावित हुए हैं। इनमें इंद्रजीत भारद्वाज, रेनू गौरावर, दाऊदयाल जोशी और कपिल फौजदार जैसे नेताओं को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं।
भाजपा में भी बढ़ी हलचल
भाजपा में भी आरक्षण के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा, जो पिछली बार मेयर पद की प्रमुख दावेदार और पराजित उम्मीदवार रही थीं, इस बार चुनाव लड़ेंगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
टिकट वितरण को लेकर बढ़ सकती है खींचतान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड आरक्षण की नई तस्वीर सामने आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकट वितरण को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। कई पुराने दावेदारों के वार्ड बदलने से नए चेहरे भी दावेदारी पेश करेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
नगर निगम चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही आरक्षण लॉटरी ने भरतपुर की राजनीति को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों में टिकट को लेकर गहन मंथन देखने को मिल सकता है।
