अंता (बारां) विधानसभा सीट पर भाजपा ने मोरपाल सुमन को उतारा मैदान में

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लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अंता (बारां) विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला — मोरपाल सुमन की एंट्री से बदले समीकरण
बीजेपी का चौंकाने वाला दांव — मोरपाल सुमन
अंता सीट पर इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए मोरपाल सुमन को उम्मीदवार बनाया है।
इस सीट से पहले पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और पूर्व विधायक कंवरपाल मीणा के नाम पर चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने अंततः संगठन और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर नया चेहरा मैदान में उतार दिया।
मोरपाल सुमन को संगठन में सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता माना जाता है।
कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया पर जताया भरोसा
दूसरी ओर कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को टिकट दिया है।
भाया पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं और उन्होंने 2018 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी कंवरपाल मीणा को हराया था।
उनकी छवि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और संगठन की पकड़ के कारण मजबूत मानी जाती है।
निर्दलीय नरेश मीणा बने तीसरा कोण
नरेश मीणा, जो कभी कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे हैं, इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।
मीणा समुदाय के वोट अंता विधानसभा में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और नरेश मीणा का उतरना मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है।
अंता विधानसभा का जातीय समीकरण
अंता सीट पर मीणा, जैन, सैनी, धाकड़ और गुर्जर समुदायों का प्रभाव है।
मीणा समुदाय का मत प्रतिशत सबसे अधिक है, जो 15% के आसपास माना जाता है।
जैन और सैनी समुदाय का भी स्थानीय क्षेत्रों में खासा प्रभाव है।
मोरपाल सुमन सैनी जाति से हैं पूर्व में प्रधान रह चुके हैं, सैनी मतदाताओं में अच्छी पकड़ है इसलिए भाजपा ने टिकट दिया है।
ग्रामीण इलाकों में किसान वर्ग का झुकाव परंपरागत रूप से भाजपा की ओर रहा है, जबकि शहरी मतदाता भाया के साथ जुड़ा हुआ है।
2018 का परिणाम
पार्टी उम्मीदवार प्राप्त वोट स्थिति
कांग्रेस प्रमोद जैन भाया 91,000+ विजेता
बीजेपी कंवरपाल मीणा 73,000+ हार
अन्य – – –
कांग्रेस ने लगभग 18,000 वोटों से जीत दर्ज की थी।
2023 में क्या नया?
भाजपा ने इस बार समीकरण बदलते हुए नया चेहरा उतारा है।
मीणा वोट बैंक का बंटवारा अब भाजपा और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच हो सकता है।
जैन और सैनी वोट कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए अहम रहेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा अपने कार्यकर्ता नेटवर्क को मजबूत तरीके से सक्रिय रखती है, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
अन्यथा, प्रमोद जैन भाया का स्थानीय नेटवर्क और अनुभव उन्हें बढ़त दिला सकता है।
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