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3 लाख 9600 रुपये लेकर भी गलत इंजेक्शन लगाया, मरीज की तबीयत बिगड़ी, विरोध करने पर परिजनों की पिटाई?

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गलत इंजेक्शन लगाने से मरीज की हालत हुई खराब , मरीज के परिजनों से साथ मारपीट , समाजिक दबाव के बाद मामला शांत

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जोधपुर। (दयाल सिंह सांखला) खबर डराने वाली है आप सोचते है की पैसे देकर मंहगे अस्पताल में अच्छा इलाज मिल जाएगा तो शायद आप गलत सोच रहे हैं, क्योंकि हो सकता है पूरे पैसे लेने के बाद भी डुप्लीकेट या नकली इंजेक्शन लगाकर आपके मरीज के जीवन पर संकट आ जाए। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया गोयल हॉस्पिटल में स्पाइनल कोड कैंसर से पीड़ित मरीज के साथ जो की केंसर की लास्ट स्टेज पर है जिसका ईलाज मुंबई स्थित निजी अस्पताल में चल रहा था। उनके परिजनों ने मुंबई के डॉक्टर से परामर्श के बाद एक इंजेक्शन लगाने का अंतिम निर्णय लिया । हालांकि इंजेक्शन भी कोई सामान्य नहीं था इंजेक्शन की कीमत करीब चार लाख रुपये 3 लाख 96 हजार रुपए थी।

3लाख 96000 हजार रुपए देने के बाद भी गलत इंजेक्शन लगाया

मरीज को बचाने के लिए परिजनों ने जैसे – तैसे करके Rs 3,96000/–का इंतजाम कर इंजेक्श जोधपुर स्थित गोयल हॅास्पिटल से खरीदा और गोयल हॅास्पिटल में ही मरीज को भर्ती करा दिया। परिजनों ने बताया की इंजेक्शन वहीं से खरीदा और अस्पताल प्रशासन ने ही मरीज के वो इंजेक्शन लगा दिया। लेकिन मरीज को इंजेक्शन लगने के बजाये दर्द होने लगा। मरीज दर्द से कराहा उठा। मरीज के चिल्लाने पर परिजनों ने पहले जोधपुर में डॅाक्टरों से बात की उसके बाद उन्होंने मुंबई के डॅाक्टर से सलाह मशविरा किया। डॅाक्टर ने बताया की जो इंजेक्शन लिखा गया था उसके स्थान पर कोई दूसरा इंजेक्शन लगा दिया। जिसके कारण मरीज की हालत खराब हो गई। यह सुनते ही परिजन के पैरो नीचे ज़मीन खिसक गई। उस बिल की कॉपी संबधित कंपनी को भेजा गया तो कंपनी ने स्पष्ट मना कर दिया यह इंजेक्शन हमारी कंपनी का नही है अन्य कंपनी का है। इस मामले को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे तो केमिस्ट स्टाफ और हॉस्पिटल स्टाफ ने मारपिटाई करने लग गए।

मामला बढ़ता को देखते हुवे मामला रफा दफा करने का काफी प्रयास किया गया अंतः परिजन कोर्ट कचरी के चक्कर में नही पड़ना चाहते थे । इसलिए अपनी बेटी को लेकर मुंबई के लिए निकलना उचित समझा। मामला फिलहाल शांत हो गया लेकिन जो सवाल परिजनों ने उठाए उनकी जांच होनी चाहिए । यह एक जनहित का मामला है। ना जाने कितने मरीजों को इस तरह का इंजेक्शन पहले भी लगाए होंगे। जो इंजेक्शन मरीज को लगाया गया वह किस कंपनी का था ? किस फर्म को इंजेक्शन जारी किया गया? लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया तो अस्पताल प्रशासन ने पुलिस बुला ली।
काफी कोशिश करने के बावजूद गोयल हॉस्पिटल के स्टॉफ ने ना फाइल दिखाई ना ही डॉक्यूमेंट दिखाएं। एक सवाल यह भी है । मरीज के पिता रतन लाल का आरोप है कि चार लाख रुपये देने के बावजूद बेटी को गलत इंजेक्शन लगा दिया गया। अस्पताल स्टॅाप बात सुनने की बजाय मारपीट करने पर उतारु हो गया। यह सरासर गलत है। क्योंकि लोग डॅाक्टर को धरती का भगवान समझते है, यदि भगवान गलती करेंगे तो उनकी शिकायत तो कहीं न कहीं तो करनी पड़ेगी। यदि कोई धरती का भगवान गलती करेगी तो उसका विरोध भी होगा। लेकिन क्या बड़े अस्पताल के संचालक किसी की जान के साथ खिलवाड़ करने के बावजूद इस तरह पाक साफ बच सकते हैं। जहां परिजन सिर्फ रो- पीट सकता है उसे न्याय नहीं मिलेगा। सवाल ये है कि जिस मंहगे अस्पताल में आप मंहगा इलाज कराने जा रहे हो वह उसके बदले आपको दे क्या रहा है। क्या एक मरीज के परिजनों को ये जानने का भी हक नहीं है कि उसके मरीज के साथ क्या किया। कौनसी दवा दी , कौनसी जांच की। तो फिर इन मंहगें अस्पतालों में जाने का क्या फायदा। सरकार को चाहिए की इस तरह के मामले आने पर उच्च स्तरीय जांच कराकर इनके लाइसेंस रद्द किए जाए , जिससे भविष्य में किसी के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं कर सके।

अस्पताल प्रशासन का कहना है की मरीज की हालत पहले से ही खराब थी। वो केंसर की अंतिम स्टेज पर है इसलिए इंजेक्शन को गलत बताना सरासर गलत है। फिर भी हम जांच करेंगे की कही किसी स्टाफ से चूक तो नहीं हो गई। या फिर गलत इंजेक्शन का रैफर दिखाकर बदनाम करने की कोई साजिश तो नहीं है।

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