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महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों को बंद करने की बजाय ,टीचर्स की भर्ती करें ,व्यवस्था सुधारे सरकार

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जयपुर। लगभग एक सप्ताह से राज्य के महात्मा गांधी स्कूल प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग षडयंत्र के तहत गरीब और जरूरतमंद विधार्थियों को अच्छी शिक्षा से वंचित कर रही है और महात्मा गांधी इंग्लिश माध्यमिक स्कूलों को रिव्यू कर हिन्दी माध्यमिक करने की तैयारी कर रही है। जबकि राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग को रिव्यू करना ही था तो महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को दुरुस्त करने के लिए करना चाहिए था, इन स्कूलों की बिल्डिंग, विधार्थियों के बैठने की व्यवस्था, स्कूलों में पर्याप्त शौचालय और सबसे जरूरी शिक्षकों की भर्ती पर रिव्यू करना चाहिए था। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा की ” मूल विषयों को छोड़कर राजस्थान सरकार उसकी जड़ को ही खत्म करने की तैयारी कर रही है, कहावत है ” ना रहेगी भैंस ना बजेगी बीन ” मतलब साफ़ राजस्थान सरकार निजी स्कूलों की कठपुतली बनकर कार्य कर रही है और अंग्रेजी स्कूलों को रिव्यू कर निजी शिक्षा माफियाओं को संरक्षण दे रही है।

संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की प्रदेश में भले ही सत्ता बदल गई हो किंतु सरकारों के संस्कार नहीं बदले, तेवर नहीं बदले। पूर्वर्ती कांग्रेस सरकार ने ढिंढोर पीटने के लिए अव्यवस्थाओं के साथ हिन्दी माध्यमिक स्कूलों को महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में तब्दील कर दिया, जिनमें लगभग साढ़े आठ हजार से अधिक शिक्षकों का गहरा अभाव था, किंतु सत्ता में रहते हुए कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने अंत तक उन भर्तियों रोके रखा, आजतक भी यह भर्तियां नहीं हो पाई है। ऐसे में कांग्रेस, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व शिक्षा मंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को इस विषय पर बोलने का अधिकार खो चुकी है।

अभिषेक जैन ने कहा की आज जिन महात्मा स्कूलों स्कूलों में पूरी व्यवस्थाएं है उन स्कूलों में जरूरत से ज्यादा आवेदन विभाग को प्राप्त हो रहे है किंतु जिन स्कूलों में व्यवस्थाएं नहीं है, शिक्षक नहीं है वहां कोई भी अभिभावक या विधार्थी क्यों आवेदन करेगे, अव्यवस्थाओं से संचालित प्रदेश कोई 100 या 200 स्कूल नहीं है बल्कि हजारों स्कूल है जिस पर वर्तमान सरकार ध्यान देकर दुरुस्त करना चाहिए, सभी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त भर्ती करनी चाहिए, स्कूल बिल्डिंगों का नवनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जिससे गरीब और जरूरतमंद अभिभावकों के बच्चों को भी एक सामान और बेहतर शिक्षा व्यवस्थाओं का लाभ मिल सके। सरकारी स्कूलों को बंद करने से शिक्षा नहीं पहुंचती, बल्कि व्यवस्थाओं को सुधारने से शिक्षा हर जगह पहुंच जाती है।

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