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भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन

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भीम आर्मी चीफ के काफिले पर पथराव

50लाख का मुआवजा, 1 सरकारी नौकरी

गहलोत सरकार को 25 तक का अल्टीमेटम

पाली। राजस्थान के पाली जिले के बाली कस्बे में जितेंद्र मेघवाल की हत्या के विरोध में आज बड़ी संख्या में है भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने बाली में प्रदर्शन किया। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के आह्वान पर आयोजित सभा में पाली ,जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर सहित आसपास के दलित समाज के लोगों ने और खासतौर पर युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने जितेन्द्र की हत्याकांड की निंदा की और कहा कि जिस तरह हत्या हुई है ये सरासर इंसानियत की हत्या है। दोषियों को कड़ी सजा मिले मृतक के परिवार वालों को ₹5000000 का मुआवजा और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिले। चंद्रशेखर आजाद रावण ने कहा कि राजस्थान में दलित समाज पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं, संविधान की धज्जियां उड़ रही है। एक युवा को सिर्फ इसलिए मार दिया जाता है क्योंकि उसने मूंछे रख ली। आज हजारों दलित युवा मूंछों में आये है ,ये लोग मूंछ रखे, क्या पहनें या न पहनें इन सबकी आजादी संविधान ने दी है। हमें गुलामी की जंजीरों को तोड़ना होगा। लेकिन कुछ लोगों की मानसिकता आज तक नहीं बदली है वे दलितों के खाने, पीने ,पहनने ओढ़ने पर भी क्यों एतराज करे। आखिर अब सब समान है। आजाद ने कहा कि भीम आर्मी किसी भी जाति समाज के खिलाफ नहीं है लेकिन जहां भी जुल्म होगा हम पीछे नहीं हटेंगे। हमारी लड़ाई जुल्म करने वालों से है। जो जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनके काफिले पर पथराव किया इस तरह की कायाराना हरकत से डरने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गहलोत सरकार से कानून व्यवस्था नहीं सम्भल रही तो इस्तीफा दे दे। अब राजस्थान का दलित, आदिवासी समाज जाग चूका है जो किसी भी कीमत पर अत्याचार बर्दास्त नहीं करेगा। हर जोर जुल्म के विरोध में सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगा।

जितेंद्र के परिजनों से की मुलाकात

चंद्रशेखर आजाद ने मृतक जितेंद्र के परिजनों से उनके गांव जाकर मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि पूरे देश का दलित समाज उनके साथ है ,भीम आर्मी उनके साथ है, और वे उनके हर सुख दुख में साथ खड़े रहेंगे, उनके बेटे की मूंछ सदैव ऊंची ही रहेगी। उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है। राम चंद्र शेखर खुद भी भावुक हो गए। जितेंद्र मेघवाल की मां और अन्य परिजन और मौजूद महिलाएं भी चंद्रशेखर को देखकर फूट-फूट कर रोने लगी। उनकी आंसुओं की धारों को देखकर चंद्रशेखर भी अपने आंसुओं को नहीं रोक सके और उन्होंने कहा कि उनका एक बेटा गया है ,लेकिन आज उनके लाखों बेटे हैं उनके लिए तैयार खड़े हैं।

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