Home rajasthan बाघों की नगरी में रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक का आगाज

बाघों की नगरी में रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक का आगाज

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:- बाघ संरक्षण की अलख जगाने को जुटे विशेषज्ञ

सवाई माधोपुर, जयपुर। (लोकेश टटवाल ब्यूरो चीफ) दुनियाभर में बाघों के संरक्षण की अलख जगाने के लिए 29 जुलाई को वर्ल्ड टागर डे मनाया जाएगा। बाघों की दहाड़ की गूंज से विश्व पटल को गुंजायमान करने के इस सिलसिले में लिव4फ्रीडम ने बड़ा कदम बढ़ाया है। आनंद भारद्वाज, नवरोज़ डी. धोंडी और सुनील मंगल द्वारा स्थापित लिव4फ्रीडम की ओर से आमाघाटी वाइल्ड लाइफ रिसोर्ट में रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक (आईटीडब्ल्यू) का आयोजन किया गया है जिसका आगाज शुक्रवार को हुआ। इसमें बाघ, पर्यावरण और जलवायु संरक्षणवादी और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।

पंजाब के पूर्व राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उनकी उपस्थिति से बाघ संरक्षण की पहल को मजबूती मिली। लिव4फ्रीडम पार्टनर और इंटरनेशनल टाइगर वीक के फाउंडर सुनील मंगल ने बताया कि पहले दिन टाइगर मैन के नाम से मशहूर दौलत सिंह और ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान, महाराष्ट्र के डिप्टी कंजर्वेटर कुशाग्र पाठक ने मानव-वन्यजीव संघर्ष और उसके प्रभाव को कम करने के उपाय बताए। टाइगर मैन दौलत सिंह ने कहा कि हमें समझना होगा कि प्रकृति में हर जीव का जीवन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। जब हम टाइगर कंज़र्वेशन की बात करते हैं तो यह पूरा ईको सिस्टम इसका केन्द्र रहता है। आरआरआईटीडब्ल्यू जैसे आयोजन बेहद जरूरी है। इंसानों के जीवन के लिए बाघों का संरक्षण बेहद जरूरी है। वहीं रणथंभौर टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर श्री अनूप कुमार बाघ अभयारण्यों के निकट सुरक्षा और आजीविका के विकल्पों पर चर्चा की।

प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर सुब्बैया नल्लामुथु ने कहा कि बाघ को कहानी का मुख्य पात्र बनाकर उसके जीवन को भावनात्मक तरीके से फिल्माने के लिए मैंने रणम्भौर से शुरुआत की। आरआरआईटीडब्ल्यू एक अच्छी पहल है जिससे जुड़ना खुशी की बात है।

संयोजक नवरोज़ धोंडी ने कहा कि इंटरनेशनल टाइगर वीक बाघों और उनके आवासों की सुरक्षा के महत्व को उजागर करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, संरक्षण प्रयासों में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल देता है। तीन दिवसीय आयोजन में वाइल्ड लाइफ डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग, वन्यजीव सफारी और वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी के विशेषज्ञों के नेतृत्व में पैनल चर्चाएँ शामिल होंगी।

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