बड़े नेताओं की लड़ाई में पिस गई महापौर मुनेश गुर्जर

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चुनाव से पूर्व मुस्लिम को बनाना का महापौर

रिश्वत के खेल के पीछे राजनीतिक मोहरे

प्रताप के अलावा दूसरे मंत्री विधायकों की भी रही भूमिका

पति सुशील की अति महत्वाकांक्षा ले डूबी मुनेश को

जयपुर। जयपुर  हैरिटेज नगर निगम की महापौर मुनेश गुर्जर के पति को दो लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। मेयर को सरकार ने भ्रष्टाचार  में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया। लेकिन जिस तरह से  इस पूरे मामले में खादय एवं  रसद मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास एक्टिव रहे उससे साफ लगता है कि सारा का सारा खेल हुआ है। जिसमें कई लोगों ने मिलकर  एक साथ काम किया है। मुनेश गुर्जर के पति ने रिश्वत लेकर कोई अच्छा काम नहीं किया लेकिन कहीं न कहीं हुआ मुनेश के साथ षड़यंत्र ही है क्योंकि माना जा रहा है कि चुनावों से पूर्व जयपुर हैरिटेज में महापौर को बदलना था। यहां कांग्रेस के दोनों विधायक अमीन कागजी और रफीक पठान भी अब अपने लोगों में से मेयर बनाना चाहते थे। क्योंकि यदि वे चुनाव होने के साथ ही किसी ओबीसी वर्ग में आने वाले मुस्लिम को महापौर बनवा देते तो वो अब तक इनके बराबर विधानसभा चुनावों में विधायक का टिकट मांगने का हकदार हो जाता। इसलिए शुरुआत में ये दोनों ही विधायक मुस्लिम वर्ग के किसी भी महिला पार्षद को महापौर बनाने के विरोध में रहे। यही कारण है कि सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम पार्षदों की होने के बावजूद मुस्लिम वर्ग की महिला को महापौर नहीं बनाया गया। लेकिन अब चुनावों के नजदीक आते ही इसकी पूरी स्क्रीप्ट तैयार की गई। अब मुनेश गुर्जर के हटते ही मुस्लिम समुदाय से महिला को महापौर बनाया जाना है। जिससे मुस्लिम समुदाय की मांग भी पूरी हो जाए और अब जो महापौर बनेगी वो विधायक के टिकट की दौड़ में भी नहीं आ सकेगी। क्योंकि अब उसके पास समय ही इतना कम बचा है कि वो चाहकर भी इस दौड़ में शामिल नहीं हो सकेगी। इसलिए कांग्रेस के सभी विधायक और मंत्री इसी कोशिश में लग गए कि जयपुर में किसी मुस्लिम महिला को  महापौर बना दिया जाए जो ओबीसी वर्ग में भी आती हो। बताया जा रहा है  कि इसका सबसे ज्यादा फायदा रफीक खान, अमीन कागजी, मंत्री महेश जोशी और प्रताप सिंह को जयपुर शहर में होना है। क्योंकि तीन विधानसभा क्षेत्र तो मुस्लिम बहुल है। सिविल लाइंस भी इलाके में भी हार- जीत का फैसला मुस्लिम ही करेंगे। कल तक खुद प्रताप सिंह मुनेश गुर्जर की पैरवी कर रहे थे आज मुनेश गुर्जर उनकी आंख की किरकिरी बनी हुई है। साफ सी बात है कि कहीं न कहीं उनके पति सुशील गुर्जर की  जल्दी पैसे बनने का ख्वाब देखना और राजनीति में तेज गति से आगे बढ़ने की ललक ने कहीं का नहीं छोडा। लेकिन राजनीति के नए खिलाड़ी और महापौर मुनेश गुर्जर का शिकार करने में प्रतापसिंह के अलावा भी कई लोग पर्दे के पीछे नजर आते है। 

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