दलित आदिवासियों पर अत्याचार के विरोध में जयपुर में जन आक्रोश क्रोश रैली में फूटा गुस्सा

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जयपुर I राजस्थान में लगातार बढ़ रहे दलित उत्पीड़न और आदिवासियों पर अत्याचारों के विरोध में राजधानी जयपुर में बुधवार को डॉक्टर अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी और एससी, एसटी अत्याचार निवारण संघर्ष समिति के आह्वान पर लोगों ने जयपुर में शहीद स्मारक से रैली निकाली I हाल ही में जालौर में मासूम छात्र के मटकी छूने पर पिटाई और उसकी मौत, इससे पूर्व पाली में जितेंद्र मेघवाल के मूछें रखने पर हत्या, बाड़ी बसेड़ी मे अधिशासी अभियंता पर जानलेवा हमला, दूल्हों क को घोड़ी से उतारने की कई घटनाएं मंदिरों में प्रवेश करने को लेकर मारपीट करने के कई मामले,डूंगरपुर गरपुर, बांसवाड़ा में आदिवासियों को जमीनों से बेदखल करना, जालौर आहोर में भीलों की बस्ती उजाड़ना, सहित कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे लोगों में सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है I

डॉक्टर बी आर अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष भजनलाल रोलन, महासचिव अनिल गोठवाल ,अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष ,आदिवासी महासभा के अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष के. सी घुमरिया, अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के कोषाध्यक्ष गोमा सागर, बी. एल बैरवा ,हरि नारायण बैरवा, सहित हजारों लोगों ने शहीद स्मारक से सिविल लाइन फाटक तक जन आक्रोश रैली निकाली I रैली में अनुसूचित जाति, जनजाति महासंघ के पदाधिकारियों के साथ साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता, आम नागरिक, सभी सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, नेता, कार्यकर्ता शामिल हुए I

सिविल लाइन फाटक पर सभी ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की I इस दौरान पुलिस के साथ भी कार्यकर्ताओं की जोर आजमाइश हुई I इसके बाद डॉक्टर अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी और sc-st संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम पर एक ज्ञापन दिया I

सभी पदाधिकारियों ने राजस्थान में दलित और आदिवासियों पर बढ़ रहे अत्याचारों को लेकर नाराजगी जाहिर की और साथ ही दलित आदिवासियों को सहायता राशि देने में राजस्थान सरकार की ओर से किए जा रहे भेदभाव को लेकर भी गुस्सा जताया I पदाधिकारियों ने साफ कहा कि कांग्रेस सरकार में भी दलित, आदिवासियों पर अत्याचार होंगे और उनके साथ सरकार भी भेदभाव पूर्ण तरीके से व्यवहार करेगी तो फिर आखिरकार उन्हें न्याय कहां मिलेगा ? पदाधिकारियों ने राजस्थान में लगातार बढ़ रहे दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की और साथ ही सरकार से दलित उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और उन पर कठोर कार्यवाही करने और मुआवजा राशि में बढ़ते जा रहे भेदभाव पर रोक लगाकर उन्हें समुचित मुआवजा देने की मांग की हैI प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि सरकार को इस तरह के मामले में पहल करनी होगी कि आजादी के 75 साल बाद भी लोगों को मंदिरों में घुसने से रोका जा रहा है, घोड़ी पर चढ़ने से पिटाई की जा रही है, मूछें रखने पर हत्या की जा रही है ,मटकी छूने पर हत्या की जा रही है आखिरकार राजस्थान जा कह रहा है I इन घटनाओं से पूरे राजस्थान में ही नहीं देश भर में सरकार की बदनामी हो रही है I साथ में सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं कि आखिरकार राजस्थान में इस तरह की घटनाएं लगातार क्यों बढ़ रही है I दलित समाज और कर्मचारियों के साथ भी कार्यालयों में भी इस तरह का मामला बढ़ रहा हैI भर्तियों में भी और खास तौर पर संविदा कर्मियों की भर्तियों में दलित, आदिवासियों की उपेक्षा हो रही है I अधिकांश विभागों में निजीकरण हो गया है I जिसके चलते अब आरक्षित वर्ग के लोगों को प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां मिलना मुश्किल हो गया हैI

इन तमाम बातों को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जाहिर की है और सरकार से मांग की है कि इन पर सुनवाई की जाए I दलित आदिवासियों का भरोसा जीता जाए I उन्होंने कहा कि दलितों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार होने लगा है I यहां भी कई कॉलोनियां ऐसी है जहां पर दलित आदिवासियों को मकान किराए पर, या खरीदने पर भी नहीं मिलते है I लेकिन सरकार की ढुलमुल कार्यवाही के चलते ही इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैI सरकार को चाहिए कि वह दलित और आदिवासियों का भरोसा जीते हैं और उन्हें न्याय प्रदान करें I इस तरह घटनाएं सामने आने पर उनके साथ कठोर कार्यवाही करें I वर्तमान में छुआछूत तो नहीं होता है, लेकिन भेदभाव भरपूर हो रहा है I खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में मंदिरों में प्रवेश करने को लेकर आज भी संघर्ष होता है I अब तो अधिकांश इलाकों में दलित वर्ग के लोगों ने इन मंदिरों में जाना ही बंद कर दिया हैI जालोर, पाली,सिरोही में तो आदिवासियों को भी मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता है I

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