जोधपुर संविधान पार्क मैं भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाने पर विरोध

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जोधपुर। जयनारायण विश्वविद्यालय में बनाए गए संविधान पार्क मैं संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाए जाने से एबीवीपी के विद्यार्थी हुए नाराज। एबीवीपी के छात्रों ने जय नारायण विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पर प्रदर्शन कर 7 दिन में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति नहीं लगाने पर छात्र उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

संविधान पार्क के नाम पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की भूमिका को छोटा करने का प्रयास

सबसे पहले जयपुर स्थित राज भवन में संविधान पार्क का निर्माण किया गया। जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया । इस पार्क में भी बाबा साहब की मूर्ति तो लगाई गई लेकिन बहुत छोटे स्तर पर और उनकी भूमिका को काफी कम कर दिया गया । जहां भी पूरे संविधान पार्क का अवलोकन करने पर आप बाबा साहब की मूर्ति को ढूंढते रह जाएंगे एक मूर्ति लगेगी तो है लेकिन बहुत सारे नेताओं के बीच में जिसे पहचाना भी मुश्किल है। लोगों ने धरने प्रदर्शन किये लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा । उसके बाद राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में भी संविधान पार्क का लोकार्पण राज्यपाल ने किया। लेकिन यहां पर भी संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को सामान्यतः छोटा हाई करके लगाया गया । जिससे कोई दूर से पहचान भी नहीं सके, कि इस पूरे संविधान निर्माण में या संविधान में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की कोई भूमिका है । अब नया मामला जोधपुर विश्वविद्यालय का है, जहां पर भी राज्यपाल ने संविधान पार्क का लोकार्पण किया है । संविधान पार्क का लोकार्पण करने के साथ हीँ यहां संविधान का मूल भाव भी लिखा जाता है । जिसमें मूल कर्तव्य और अधिकारों का उल्लेख होता है। लेकिन यह एक बहुत बड़ी साजिश के तहत किया जा रहा है । जिसमें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की भूमिका को बहुत छोटा किया जा रहा है। जबकि पूरे जनमानस में संविधान निर्माता के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की छवि बन चुकी है, जिसे लोग चाह कर भी छोटा नहीं कर सकेंगे। लेकिन राज्यपाल जैसे पद पर बैठे हुए व्यक्ति के द्वारा भी इस तरह का कृत्य किया जाना लोगों के गले नहीं उतर रहा है ।आखिरकार यह गलती किस स्तर पर हो रही है ।यह समझ से पर है। लेकिन यह गलती इतनी छोटी नहीं है कि जिसे माफ किया जाए जिस संविधान पार्क का नाम निर्माण किया जा रहा है। उसी संविधान पार्क में यदि डॉ भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा नहीं लगेगी तो लोगों को संदेश क्या जाएगा, कि यह संविधान उस व्यक्ति द्वारा लिखा गया है । जिसको लेकर देश के विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रहा है लेकिन संविधान पार्क में उसे आदमी की प्रतिमा को नहीं लगा कर उसे आदमी को छोटा किया जा रहा है उसके योगदान को बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जो इस देश की सबसे आखिरी छोर पर माने जाने वाली दलित समाज से आने वाला व्यक्ति था ।जिसने संविधान लिखा, जिससे सबको न्याय मिला संविधान की दृष्टि में सब भारतीय बराबर है। लेकिन संविधान पार्क में जिस तरह से बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की भूमिका को काम करके दिखाया जा रहा है। यह उनके साथ अन्याय के समान है और लोगों में धीरे-धीरे इसके खिलाफ विरोध बढ़ता जा रहा है । सरकार में बैठे लोग सोचते हैं कि ऐसा करने से संविधान पार्क बनाने से दलित समुदाय आदिवासी समुदाय खुश होगा, लेकिन जब उसमें संविधान लिखने वाला ही गायब होगा उसके अनुयाई कैसे खुश होंगे। अब जोधपुर में एबीवीपी के लोगों ने भी इस बात का विरोध किया है कि संविधान पार्क में डॉक्टर भीमराव की अंबेडकर प्रतिमा नहीं लगना सरासर अपमान है।

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