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कॉलेज गेस्ट फैकल्टी सहायक आचार्यों ने दिया ज्ञापन, बोले हमारी भी सुनो सरकार !

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

नागौर, न्यायालय से बड़ी है सरकार – राजसेस

नागौर। ( श्याम माथुर )गेस्ट फैकल्टी सहायक
आचार्यों (रा.ज.से.स.) ने आज भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा क्षेत्रीय व रालोपा संयोजक व नागौर सांसद से भी ज्ञापन देकर मदद करने की अपील करते हुए कहा कि भारत के सर्वोच्च शिक्षक आज स्वयं के प्रति न्याय एवं सहानुभूति के लिए तरस रहे हैं। अतः सभी विद्या संबल योजना में कार्यरत कॉलेज सहायक आचार्यों का नियमितीकरण एवं मांगों का स्थायी समाधान करने की अपील की है।

राजसेस के भविष्य की तरफ ध्यान दें:-
राजस्थान सरकार विगत चार सत्रों से राजसेस कॉलेजों में कार्यरत वीएसवाई सहायक आचार्यों को मासिक वेतन व अन्य शिक्षण कार्य सौंपे। राज्य सरकार द्वारा राजसेस महाविद्यालयों में नियुक्त विद्या संबल योजना के तहत कार्यरत नागौर जिले के सहायक आचार्य संगठन के सदस्यों डॉ. गणेशा राम, डॉ. दिनेश सैनी, डॉ. रामगोपाल डिडेल, डॉ. जुगलेश कालवा, संगीता गोदारा, रणवीर हुड्डा, राजेन्द्र, देवकरण, योगेश टाक, मुन्ना लाल प्रजापत, अनिल देशमुख, गरिमा सोनी एवं अन्य ने बताया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल, उच्च शिक्षा मंत्री व उप-मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर समय- समय पर हमारी मांगे पूरी करने के लिए कई बार अवगत करवाया गया है लेकिन अभी तक हमारी मांगों की तरफ सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। विगत सरकार ने यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार उच्च योग्यताधारी व अनुभवी अस्थायी कॉलेज सहायक आचार्यों को सत्र 2021-22 से वीएसवाई के तहत एपीआई स्कोर की मेरिट के आधार पर नवीन खोले गए राजसेस कॉलेजों व नोडल कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के रूप में अध्यापन कार्य हेतु लगाया गया।

छह – छह माह के लिए रखा जाता है कार्य पर :-

पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि हर 6 माह बाद बार-बार विज्ञापन निकालकर हमे ईसी कार्यके लिए नियुक्त किया जाता है और हमें 6 माह बाद मौखिक आदेश से हटा दिया जाता है, जो बहुत बड़ा अन्याय है जबकि सभी कॉलेजों में वर्तमान में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू होने से कक्षाएं लगातार संचालित होती रही है अतः इनकी मांग है कि हमें बार-बार हटाया नहीं जाए बल्कि कन्टीन्यू रखा जाए।

न्यायालय से ऊपर सरकार :-

इस सन्दर्भ में उच्च न्यायालय ने भी
हमे हटाने पर रोक लगा रखी है लेकिन आयुक्तालय इसकी पालना नहीं कर रहा है।

काम नहीं तो दाम नहीं :-

हमे वेतन 800₹ प्रति कालांश के आधार पर प्रत्येक सप्ताह अधिकतम 14 कालांश का ही दिया जाता है जिससे विद्यार्थियों का सिलेबस भी समय रहते पूरा नहीं हो पाता है। जानकारी अनुसार राज्य सरकार द्वारा एक तरफ राजकीय महाविद्यालयों में नियुक्त स्थायी सहायक आचार्यो को एक से दो लाख के लगभग प्रत्येक माह वेतन दिया जाता है वहीं भाजपा शासित हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड इत्यादि राज्यों में इन अस्थाई कॉलेज प्रोफेसरों को यूजीसी के नियमों के अनुसार 57,700 प्रति माह वेतन दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ इन्हीं अस्थाई योग्यताधारियों को राजस्थान में काम के बदले दाम, काम नहीं तो दाम नहीं नीति पर बहुत ही कम, 800/ रूपये प्रति कालांश पर रखा गया है, तथा यह वेतन भी समय पर नहीं दिया जाता है। अधिकतर कॉलेजों में बजट नहीं होने का बोलकर पिछले पाँच माह से इन सहायक आचार्यों को वेतन के लिए तरसना पड़ रहा है ऐसी स्थिति में परिवार व स्वयं का खर्च चलाना भी कठिन हो रहा है।

मुख्य मांगे :-

अतः इनकी सरकार से यही मुख्य मांग है कि राजसेस कॉलेजों व नोडल कॉलेज के राजसेस पदों पर कार्यरत सहायक आचार्यों के रोजगार व भविष्य को मद्देनजर रखते हुए हटाया न जाए और वेतन कालांश की बजाय मासिक आधार पर प्रतिमाह देकर अन्य शिक्षण कार्य भी सौंपे जाने चाहिए ताकि इन कॉलेजों की शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार हो व शिक्षण गतिविधियों को सही ढंग से संचालित किया जा सके और विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

RajCES (राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी) में आरपीएससी से चयनित सहायक आचार्यों को नियुक्ति नहीं दी सकती क्योंकि इसमें भर्ती व चयन प्रक्रिया राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी के द्वारा ही करने का प्रावधान है। आरपीएससी से चयनित सहायक आचार्य को इन राजसेस कॉलेजों में केवल कार्यव्यवस्थार्थ (डेपुटेशन) के रूप में कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से लगाया जा सकता है लेकिन ऐसा करने से उस मूल पद पर कोई फैकल्टी कार्यरत नहीं होती है जिससे उस कॉलेज में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी जहां से डेपुटेशन किया जाता है। अतः इन राजसेस कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के सहायक आचार्यों को अध्यापन कार्य के साथ-साथ अन्य शिक्षण कार्य सौंपकर शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है। पिछले चार सत्रों से इन गेस्ट फैकल्टी सहायक आचार्यों ने इन कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था का मोर्चा संभाल रखा है। अतः सरकार इन अनुभवी सहायक आचार्यों को मासिक वेतन देकर व अन्य शिक्षण कार्य सौंपकर इस व्यवस्था को पटरी पर ला सकती है ताकि विद्यार्थियों को उद्यापन के साथ-साथ अन्य शिक्षण गतिविधियों का लाभ मिल सके।

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