लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
11.70 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभाव से आदिवासी अंचलों के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्ष 2025-26 की तुलना में वर्ष 2026-27 में जनजातीय क्षेत्रों के विद्यालयों में 14 हजार 780 विद्यार्थियों की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कुल नामांकन बढ़कर 11 लाख 70 हजार 242 तक पहुंच गया है।
63 लाख से अधिक घरों का सर्वे, 6 हजार से ज्यादा ड्रॉपआउट बच्चे जुड़े
शिक्षा से वंचित बच्चों को फिर से विद्यालयों से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने 63 लाख 26 हजार घरों का पेपरलेस सर्वे कराया। सर्वे के दौरान 6 हजार 229 ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की गई, जिन्हें ब्रिज कोर्स के माध्यम से दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
शिक्षा पर बढ़ा निवेश, मजबूत हो रही भविष्य की नींव
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार जनजाति विकास बजट का 13 प्रतिशत से अधिक हिस्सा, लगभग 164 करोड़ रुपये, शिक्षा पर खर्च कर रही है।
इसके अलावा 10 नए आश्रम छात्रावास, 2 आवासीय विद्यालय और 1 खेल छात्रावास की स्थापना के लिए 64 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित आवासीय सुविधाएं भी मिलेंगी।
9,817 विद्यालयों में लाखों विद्यार्थी ले रहे शिक्षा
जनजातीय क्षेत्रों में वर्तमान में 9 हजार 817 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें—
- 5,866 प्राथमिक विद्यालय
- 1,664 उच्च प्राथमिक विद्यालय
- 2,146 उच्च माध्यमिक विद्यालय
- 141 संस्कृत विद्यालय
शामिल हैं। इन विद्यालयों में 11 लाख 81 हजार 100 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे आदिवासी क्षेत्र के विद्यालय
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में विशेष विद्यालयों का विस्तार किया गया है। यहां—
- 69 पीएम श्री विद्यालय
- 17 स्वामी विवेकानंद मॉडल विद्यालय
- 210 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय
- 24 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय
संचालित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही 1 लाख 48 हजार 808 प्रवेश क्षमता वाले 3 हजार 821 आश्रम छात्रावास, खेल छात्रावास, कॉलेज छात्रावास, बहुउद्देशीय छात्रावास, आवासीय विद्यालय, मॉडल पब्लिक रेजिडेंशियल स्कूल, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल और मां-बाड़ी डे केयर केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
29 हजार से अधिक बालिकाएं और महिलाएं शिक्षा से जुड़ीं
ड्रॉपआउट बालिकाओं और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए संचालित कालीबाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना के तहत दिसंबर 2023 से जून 2026 तक 29 हजार से अधिक महिलाओं एवं बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
छात्रवृत्ति और स्कूटी योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
अनुसूचित जनजाति उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 305 करोड़ रुपये खर्च कर 1 लाख 53 हजार 152 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया।
वहीं कालीबाई भील मेधावी स्कूटी योजना के माध्यम से प्रतिभाशाली छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराकर उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राज्य सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल रहे हैं और शिक्षा के माध्यम से उनका भविष्य मजबूत हो रहा है।
