लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
80 लाख रुपए स्वीकृत
गंगधार ,झालावाड़ (सुनील निगम)। झालावाड़ जिले के गंगधार स्थित ऐतिहासिक किले और छोटी कालीसिंध नदी के तट पर बने रानीमहल के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए राज्य सरकार ने पहल की है। ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजा का किला, रानीमहल और देवल माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कुल 80 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
नगरवासियों द्वारा लंबे समय से इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और मरम्मत की मांग की जा रही थी। राज्य सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना के तहत गंगधार में रानीमहल तथा राजा के किले के जीर्णोद्धार के लिए 40–40 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।
गंगधार नगर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। एक दंतकथा के अनुसार प्राचीन समय में कैरव राजपूतों ने इस नगर को अपने गुरु गर्गाचार्य को जागीर के रूप में दिया था। उस समय नगर का नाम गिरिगरन बताया जाता है, हालांकि इसके ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। गंगधार को ऋषि गर्गाचार्य की तपोस्थली भी माना जाता है, जिसके प्रमाण आज भी यहां देखे जा सकते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार गंगधार का प्रमाणित इतिहास पांचवीं शताब्दी से मिलता है, जिसका उल्लेख राजा विश्व वर्मन के शिलालेख में मिलता है। गंगधार के प्रथम नरेश नरहरदास झाला ने नगर की सुरक्षा के लिए यहां किले का निर्माण करवाया था। किले में उनकी कुलदेवी विशवन्त माता का मंदिर भी स्थापित किया गया था। इसके साथ ही एक सुंदर महल का निर्माण हुआ और किले से सटा हुआ देवल माता का प्राचीन मंदिर भी आज तक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
समय के साथ उचित देखरेख के अभाव में गंगधार का किला, रानीमहल और अन्य ऐतिहासिक स्थल जर्जर होने लगे थे। नगरवासियों और सामाजिक संगठनों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से इनके संरक्षण की मांग उठाई थी।
राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद गंगधार नगर में खुशी का माहौल है और लोगों ने सरकार का आभार व्यक्त किया है।
समाजसेवी बंशी राठौर ने कहा कि सरकार द्वारा स्वीकृत राशि से न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित होगी बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वहीं समाजसेवी मनीष मिश्रा ने बताया कि लंबे समय से चल रही मांग को वित्तीय स्वीकृति मिलने से गंगधार की ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिलेगा और ये धरोहर नए स्वरूप में सामने आएगी।
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