लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सवाई माधोपुर,रणथम्भौर से लोकेश टटवाल की विशेष रिपोर्ट
रणथंभौर । शेरपुर वन नाका क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज़ किया गया बाघिन RBT 2508 को। डॉ. राजीव गर्ग, रेंजर अश्विनी प्रताप की टीम ने सफलता पूर्वक किया बाघिन को ट्रेंकुलाइज़।
रामगढ़ विषधारी अभ्यारण्य में भेजा जा रहा बाघिन अनवी की बहन RBT 2508 को। पिछले करीब 3 दिन से टीम तलाश रही थी । बाघिन RBT 2508 को,आज मिली टीम को सफलता, फील्ड डायरेक्टर अनूप के आर के निर्देशन में सुरक्षित शिफ्टिंग की गई RBT 2508 की।

बाघिन एरोहेड के तीनों शावकों की शिफ्टिंग के लिए काफी गंभीर नजर आ रहे अनूप के आर,
उच्च स्तरीय अनुमति मिलने के बाद के तीनों शावकों को किया जा रहा शिफ्ट, एरोहेड के बेटे को कैलादेवी अभ्यारण्य के एंक्लोजर में कुछ दिन पूर्व कर दिया गया शिफ्ट।
अब भिड़ एंक्लोजर में बंद बाघिन एरोहेड की बेटी अन्वी की होगी शिफ्टिंग।
रणथम्भौर में एक बाद एक इंसान को इन शावकों ने बनाया 2 माह के भीतर शिकार ऐसे में बड़ा निर्णय लेना बनी मजबूरी लेकिन हैरत की बात तो यह है कि रणथंमभौर के अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन बाघो की शिफ्टिंग करके इनकी गलतियों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। रणथंबोर के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग पिछले कई आंदोलन में उठी लेकिन सिर्फ खाना पूर्ति करने के लिए शावकों को तो शिफ्ट किया गया ,लेकिन अब तक ऐसे मोनिटरिंग में लापरवाह अधिकारी रणथंबोर में टिके हुए हैं पिछले दिनों मंत्री डॉ किरोडी लाल मीणा ने भी इन लापरवाह अधिकारियों पर सवाल उठाए थे।
लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन कब
लेकिन अब तक सरकार उनके खिलाफ कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं कर रही ऐसे में पिछले दिनों आंदोलन करने वाले आंदोलनकारीयो की भी मांग है कि ऐसे लापरवाह अधिकारी जिनके कारण एक के बाद एक तीन घटनाएं रणथंबोर में घटी, तीन परिवार न्याय के लिए रोते बिलखते रहे लेकिन कोई भी अधिकारी उनके आंसू तक पूछने के लिए घटनास्थल नहीं पहुंचे। उनके परिवार को ढांढस बंधाने आज तक कोई अधिकारी नहीं गया । उसके बाद इन अधिकारियों को वन्यजीवों की मॉनिटरिंग में लापरवाह मानते हुए कार्रवाई की जाने की मांग की गई थी लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होना विभाग व राज्य सरकार के ऊपर भी सवालिया निशान खड़े करता नजर आ रही है।
पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद
आज भी उन परिवारों को इनके खिलाफ उचित कार्रवाई होने का इंतजार है, अब देखने वाली बात यह होगी कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कब तक सरकार कार्रवाई कर उन मृतकों की आत्मा को शांति प्रदान करने का कार्य करती है।