लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘एक जिला एक उत्पाद नीति-2024’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस पहल से न केवल पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
लोकल से ग्लोबल की ओर कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन के अनुरूप यह नीति राजस्थान के हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। इससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को नई पहचान मिल रही है।
उद्यमियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता
नीति के तहत नए लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को परियोजना लागत का 25% (अधिकतम 25 लाख रुपये) तक मार्जिन मनी सब्सिडी दी जा रही है।
साथ ही, आधुनिक तकनीक और सॉफ्टवेयर खरीद पर 50% (अधिकतम 5 लाख रुपये) तक सहायता, गुणवत्ता प्रमाणन और आईपीआर पर 75% तक (अधिकतम 3 लाख रुपये) पुनर्भरण का प्रावधान है।
ई-कॉमर्स और मार्केटिंग को बढ़ावा
उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने, कैटलॉगिंग और वेबसाइट विकास के लिए भी आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत हो रही है और उन्हें व्यापक बाजार मिल रहा है।
प्रदर्शनियां और प्रशिक्षण से मिल रही नई दिशा
राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनियों का आयोजन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। इससे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ उनकी मांग भी बढ़ रही है।
यह नीति राजस्थान के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान देने के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रही है।





















































