लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर।“संगीत ना केवल चर बल्कि अचर जगत की संवेदनाओं को भी प्रभावित करता है। जगदीश चंद्र बसु को केस्टोग्राफ से पता चला कि किसी वनस्पति के पास भी कोई वादन करते हैं तो वह भी उत्साह प्रकट करता है, भारतीय संगीत परंपरा में अगर वर्षा नही होती है तो उसके लिए संगीत है, रोग ठीक नहीं होता है उसके लिए भी संगीत है , हमारे यहां सुख में भी संगीत बजता है और दुख में भी संगीत बजता है अर्थात जन्म और मरण दोनों पर गीत वादन भारत संस्कृति की परंपरा है। संघ में संगीत यानी घोष विभाग ने ऐसी स्वदेशी रचनाओं का निर्माण किया है जिनका उपयोग आज भारतीय सेना भी कर रही है” ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने ऋषि गालव भाग की ओर से जयपुर प्रांत घोष दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम “नाद गोविंदम्” के अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कही।
इस अवसर पर तोपखाना संघस्थान से, पांच बत्ती, एम आई रोड, अजमेरी गेट, न्यू गेट होते हुए रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल तक घोष पथ संचलन निकाला। घोष वाद्य यंत्रों की स्वरलहरियों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए पथ संचलन अल्बर्ट हॉल पहुंचा।
ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल पर आयोजित
प्रकट कार्यक्रम में कुल 91 घोष वादक स्वयंसेवकों ने भाग लिया।