लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
कोटपूतली-बहरोड़। ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन कोटपूतली-बहरोड़ एवं नगर परिषद कोटपूतली द्वारा यूनिसेफ (UNICEF) और बावड़ी बाईसा के सहयोग से शनिवार को शिव मंदिर तालाब बावड़ी (गंगा सागर तालाब) में विशेष स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। अभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, भारत स्काउट एवं गाइड, एनसीसी, स्वच्छता सेवा दल, लायंस क्लब, पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में शहरवासियों ने श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया।
अभियान के दौरान ऐतिहासिक बावड़ी परिसर की साफ-सफाई की गई और जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने सामूहिक श्रमदान कर यह संदेश दिया कि जल धरोहरों का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता ने कहा कि जल संरक्षण आज पर्यावरण ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे जल-संवेदनशील प्रदेश में प्रत्येक बूंद का संरक्षण आवश्यक है। हमारी ऐतिहासिक बावड़ियां, तालाब और कुएं भारतीय जल प्रबंधन की समृद्ध परंपरा के प्रतीक हैं, जिनका संरक्षण सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में भी अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि गिरते भू-जल स्तर, अनियोजित जल दोहन और बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। प्रशासन लगातार जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए प्रयासरत है, लेकिन इसकी सफलता तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाए।
जिला कलेक्टर ने कहा कि श्रमदान केवल स्वच्छता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने अभियान में युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी की सराहना करते हुए इसे जल संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
उन्होंने आमजन से वर्षा जल संचयन को अपनाने, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जल स्रोतों में कचरा और प्लास्टिक नहीं डालने तथा अपने आसपास की पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से जिले की ऐतिहासिक जल धरोहरों का पुनर्जीवन, भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।
अतिरिक्त जिला कलक्टर ओमप्रकाश सहारण ने कहा कि राजस्थान की बावड़ियां केवल जल संग्रहण संरचनाएं नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन समय की मांग है। यदि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जाए और बावड़ियों व तालाबों को स्वच्छ रखा जाए तो भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण सरकारी योजनाओं के साथ-साथ जनसहभागिता से ही सफल हो सकता है। प्रत्येक नागरिक, सामाजिक संस्था, युवा और विद्यार्थी यदि अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो जल संरक्षण एक प्रभावी जनआंदोलन बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
