लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली |(रितु मेहरा)
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। वित्त वर्ष 2025–26 की जनवरी–मार्च तिमाही में भारत के चालू खाते (Current Account) में 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर का अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज किया गया है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.7 प्रतिशत है और भारत के बाह्य क्षेत्र (External Sector) की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, चालू खाते में यह अधिशेष मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र के मजबूत निर्यात, विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई रिकॉर्ड धनराशि (Remittances) तथा व्यापार घाटे में कमी के कारण संभव हुआ है। इन कारकों ने देश की विदेशी मुद्रा स्थिति को और मजबूत बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चालू खाते में अधिशेष भारत की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक है। इससे विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को भी दर्शाता है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि आने वाली तिमाहियों में निर्यात और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन इसी तरह मजबूत बना रहता है, तो भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।
भारत की मजबूत बाह्य आर्थिक स्थिति और संतुलित चालू खाते का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद स्थिर और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।