शहीद की पार्थिव देह देखकर मां और पत्नी हुई बेसुध

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क 

सैन्य सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि, शहीद जवान के चार साल के बेटे ने दी मुखाग्नि,

करीब 10 किलोमीटर तक निकली तिरंगा यात्रा


लोसल (सीकर) से ओम प्रकाश सैनी

सीकर, लोसल l धोद इलाके के गांव नागवा के शहीद हुए राजेंद्र बगड़िया का आज दोपहर को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, चार साल के बेटे दिव्यांशु ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी, जिसको देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई,इससे पहले धोद थाने से नागवा गांव तक भारी जन सैलाब के साथ करीब 10 किलोमीटर तिरंगा यात्रा निकली, जिसमें शहीद राजेन्द्र कुमार अमर रहे के नारे लगाए गए। तिरंगा यात्रा के बाद जैसे ही शहीद की पार्थिव देह घर पहुंची तो बेटे की पार्थिव देह को देखते ही मां और शहीद की पत्नी बेसुध हो गई। शहीद के अंतिम संस्कार के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा,धोद विधायक गोरधन वर्मा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनीता गठाला,उपजिला प्रमुख ताराचंद धायल, भाजपा नेता हरिराम रणवा, कांग्रेस नेता जगदीश दानोदिया, एडीएम रतन कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

आपको बता दें कि जवान राजेंद्र प्रसाद ने 2012 में सशस्त्र सीमा बल में भर्ती होकर देश सेवा शुरू की थी। डेढ़ साल से वे जम्मू कश्मीर के गोंडा जिले के गंडोह इलाके में 7 बटालियन की F कंपनी में तैनात थे। शनिवार सुबह ड्यूटी के दौरान बिल्डिंग की छत से नीचे गिरने से राजेंद्र कुमार घायल हो गए थे, जिन्हें गंभीर चोट आने पर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज लाया गया,जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। शहीद जवान राजेंद्र कुमार के दो बेटियां और एक बेटा है।
शहीद की 9 साल की बेटी बोली, पिता की तरह ही सेना में जाकर करूंगी देश सेवा

नागवा के शहीद राजेंद्र बगड़िया की 9 साल बड़ी बेटी दिव्या ने कहा कि मेरे पिता ने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए है में भी उनके पदचिन्हों पर चलकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करूंगी।

दस दिन पहले ही गांव से छुट्टी पुरी कर ड्यूटी पर गया था जवान , दोनों बेटियों और बेटे से दो दिन पहले ही की थी बात

शहीद राजेंद्र बगड़िया अपने घर से 10 दिन पहले ही ड्यूटी पर गए थे 2 दिन पहले ही शहीद राजेंद्र ने अपने दोनों बेटियों और बेटे से फोन पर बात की थी। बड़ी बेटी दिव्या ने बताया कि पिता का फोन आया था, लेकिन मेरे दादा और दादी से बात कर रहे थे, इस दौरान उसे नींद आ गई थी। पिता से आखरी बार बात छोटी बहन नव्या और भाई दिव्यांशु ने की थी।

टकटकी लगाकर लगातार देखती रही पत्नी, हो गई बेसुध

शहीद राजेंद्र बगड़िया की पत्नी सुमन को शहीद के आखिरी दर्शन के लिए लाया गया, तो वह अपने पति को टकटकी लगाकर देखती रही और इसके बाद वह बेसुध हो गई। जिसको उसके भाइयों ने संभाला।

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