लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानव दर्शन मूलतः सनातन विचार ही है, जो आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक है। वे जयपुर में एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. भागवत ने कहा कि ‘धर्म’ का अर्थ किसी मत या पंथ से नहीं बल्कि “सबकी धारणा करने वाले सिद्धांत” से है। दुनिया को इसी धर्म-आधारित एकात्म मानव दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता कभी विवाद का कारण नहीं बनी बल्कि उत्सव का विषय बनी है।
उन्होंने बताया कि विज्ञान की प्रगति के बावजूद मनुष्य में संतोष और स्वास्थ्य नहीं बढ़ पाया। वैश्विक स्तर पर चार प्रतिशत लोग 80% संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे असमानता बढ़ रही है। भारत में परिवार व्यवस्था आर्थिक स्थिरता की बड़ी ताकत है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने दी। उन्होंने सृष्टि की एकात्मता और वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बेरवा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद एवं संघ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अंत में डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा डॉ. नर्मदा इंदौरिया ने संचालन किया।















































