लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजसमंद झील के ओवरफ्लो पानी को चंद्रभागा नदी से जोड़ने के लिए लिंक नहर की मांग तेज, किसानों और जल विशेषज्ञों ने सरकार से तकनीकी सर्वे कराने की अपील की।
सत्यनारायण सेन गुरला |
राजसमंद/भीलवाड़ा। राजस्थान के राजसमंद और भीलवाड़ा जिलों में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को नई दिशा देने वाली एक महत्वाकांक्षी लिंक नहर परियोजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय जल विशेषज्ञों, किसानों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि राजसमंद झील में मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए एक विशेष लिंक नहर का निर्माण कराया जाए।
खारी फीडर की क्षमता बढ़ने से बढ़ेगी पानी की आवक
जानकारी के अनुसार, राजसमंद झील में पानी पहुंचाने वाली खारी फीडर की चौड़ाई पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कर दी गई है। इसके बाद मानसून में झील में पानी की आवक पहले से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजसमंद झील कम समय में अपनी पूर्ण भंडारण क्षमता तक पहुंच सकती है, जिसके बाद अतिरिक्त पानी ओवरफ्लो होकर बह जाता है।
क्या है प्रस्तावित लिंक नहर परियोजना?
प्रस्ताव के अनुसार, राजसमंद झील में ओवरफ्लो होने वाले अतिरिक्त पानी को संरक्षित करने के लिए एक नई लिंक नहर बनाई जाए। यह नहर राजसमंद झील से निकलकर देवपुरा होते हुए गलवा गांव में काबरी महादेव मंदिर के पास चंद्रभागा नदी से जोड़ी जाए। इससे झील का अतिरिक्त पानी चंद्रभागा नदी में प्रवाहित किया जा सकेगा।
लगभग 20.6 किलोमीटर का प्रस्तावित मार्ग
प्रस्तावित योजना के अनुसार, राजसमंद झील के पूर्वी किनारे (कांकरोली-राजनगर क्षेत्र) से गलवा गांव तक हवाई दूरी लगभग 20.6 किलोमीटर है। नहर का संभावित मार्ग देवपुरा होते हुए गलवा तक प्रस्तावित किया गया है, जहां इसे चंद्रभागा नदी से जोड़ा जा सकता है।
चंद्रभागा और रायथलिया बांध को मिल सकता है अतिरिक्त पानी
योजना के समर्थकों का दावा है कि यदि यह लिंक नहर बनाई जाती है, तो राजसमंद झील का अतिरिक्त पानी पहले चंद्रभागा बांध और उसके बाद रायथलिया बांध तक पहुंच सकता है। दोनों बांध भरने के बाद अतिरिक्त पानी आगे बनास नदी में प्रवाहित हो सकता है, जिससे नदी के प्रवाह को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
संभावित लाभ
यदि प्रस्तावित परियोजना व्यवहारिक और तकनीकी रूप से संभव पाई जाती है, तो इसके कई संभावित लाभ सामने आ सकते हैं—
- चंद्रभागा और रायथलिया बांधों में अतिरिक्त जल संग्रहण।
- हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार।
- मार्ग के आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर बढ़ने की संभावना।
- गर्मियों में पेयजल संकट कम करने में सहायता।
- जल संरक्षण के साथ वर्षा जल का बेहतर उपयोग।
किसानों और ग्रामीणों की मांग
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने राज्य सरकार एवं जल संसाधन विभाग से इस प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विशेषज्ञों द्वारा परियोजना को व्यवहारिक माना जाता है, तो यह राजसमंद और भीलवाड़ा क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
तकनीकी अध्ययन के बाद ही होगा फैसला
हालांकि, फिलहाल यह एक प्रस्तावित अवधारणा है और इस पर कोई आधिकारिक स्वीकृति या सरकारी घोषणा नहीं हुई है। परियोजना की व्यवहार्यता, लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और जल उपलब्धता का आकलन विस्तृत तकनीकी सर्वे और जल संसाधन विभाग के अध्ययन के बाद ही संभव होगा।
