Home latest रामभक्ति और शौर्य का संगम

रामभक्ति और शौर्य का संगम

0

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

मेजर दलपत सिंह बलिदान दिवस पर रावणा राजपूत समाज का आयोजन

फुलेरा की ऐतिहासिक रेलवे रामलीला में उमड़ा जनसैलाब, मां सीता की विदाई पर भावुक हुई जनकपुरी

फुलेरा (हेमन्त शर्मा)।
कस्बे की ऐतिहासिक रेलवे रामलीला की परंपरा सोमवार को ऐसी सजी कि पूरा नगर रामभक्ति में सराबोर हो गया। गलियों में “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारे गूंजे तो छतों और चौबारों से श्रद्धालु प्रभु श्रीराम की बारात का दीदार करने उमड़ पड़े।

अयोध्यापुरी रंगमंच से गाजे-बाजे और शाही ठाठ के साथ निकली राम बारात ने पलों में जनसैलाब का रूप ले लिया। झांकियों, ढोल-नगाड़ों और नृत्यरत बारातियों ने ऐसा माहौल रचा मानो मिथिला की धरती पर ही सभी साक्षात खड़े हों।


जनकपुरी में हुआ भव्य स्वागत

जब बारात जनकपुरी के मेजर दलपत सिंह सर्कल पहुंची तो पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। रावणा राजपूत समाज की मेजबानी और परंपरा ने इस पल को और ऐतिहासिक बना दिया।

विवाह प्रसंग में वह क्षण आया जब श्रीराम ने तोरण के नीचे झुकने से इनकार किया। तभी माता सीता ने मुस्कुराते हुए लक्ष्मण की ओर संकेत किया। लक्ष्मण तुरंत प्रभु के चरणों में झुके और जैसे ही श्रीराम उन्हें उठाने लगे, माता सीता ने वरमाला डाल दी। यह अलौकिक दृश्य जय श्रीराम के जयघोष और तालियों से गूंज उठा।


विवाह और भावुक विदाई

रात्रि में पूरे विधि-विधान के साथ विवाह और कन्यादान की रस्में अदा की गईं। कन्यादान की बेला में वातावरण में गहरी शांति छा गई। श्रद्धालु इस दिव्य क्षण को देखकर भाव-विभोर हो उठे।

सबसे भावुक दृश्य विदाई का रहा। जब मां सीता की डोली उठी तो जनकपुरी का हर कोना भावनाओं से भीग गया। महिलाओं की आंखें नम हो गईं, बुजुर्ग भावुक हो उठे और बच्चों तक ने विदाई का दर्द महसूस किया। विवाह का उल्लास और विदाई की पीड़ा—दोनों भावनाओं ने वातावरण को छू लिया।


बलिदान दिवस से जुड़ा आयोजन

इस अवसर पर रावणा राजपूत समाज के रमेश सिंह पंवार व उनकी धर्मपत्नी ने सीता के माता-पिता की भूमिका निभाई। समाज के गोविंद सिंह बडगुर्जर ने बताया कि हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह के बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभु श्रीराम की सेवा का अवसर मिलना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।


मौजूद रहे समाजजन

कार्यक्रम में हनुमान सिंह परिहार, गिरधारी सिंह शेखावत, गोविंद सिंह बडगुर्जर, वीरेंद्र दिया, मानसिंह, विकास सिंह, वीरेंद्र सिंह बडगुर्जर, इंद्र सिंह, दीप सिंह सहित सैकड़ों प्रबुद्धजन और मातृशक्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान समाज की होनहार प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।


ऐतिहासिक परंपरा आज भी जीवंत

ब्रिटिश काल से चली आ रही यह रामलीला आज भी उतनी ही जीवंत और भावनात्मक बनी हुई है। स्थानीय कलाकारों के प्रभावी अभिनय ने जनकपुरी को मिथिला और अयोध्यापुरी को सजीव अयोध्या में बदल दिया।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version