लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नव उत्थान–नई पहचान, बढ़ता राजस्थान–हमारा राजस्थान
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में राज्य के डेयरी क्षेत्र ने बीते दो वर्षों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। डेयरी अब केवल पारंपरिक व्यवसाय न रहकर तकनीक-आधारित, संगठित और लाभकारी उद्योग के रूप में उभर रही है। सरकार की योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हुई है और पशुपालकों व दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक संबल मिला है।
5 लाख किसानों को 1172 करोड़ रुपये का अनुदान
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत पिछले दो वर्षों में लगभग 5 लाख दुग्ध उत्पादकों को 1,172 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है। इसके साथ ही सरस सामूहिक आरोग्य बीमा योजना के अंतर्गत 34 हजार दुग्ध उत्पादकों को 3 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा दी गई है।
राज्य सरकार ने सरस मायरा योजना भी शुरू की है, जिसके तहत दुग्ध उत्पादक सदस्यों की बेटियों के विवाह हेतु 21,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
47 वर्षों में सर्वाधिक लाभ और टर्नओवर
सरकार के प्रभावी प्रबंधन से राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) का वार्षिक टर्नओवर 8 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आरसीडीएफ और जिला दुग्ध संघों का कुल लाभ व टर्नओवर पिछले 47 वर्षों में सर्वाधिक रहा है। वार्षिक लाभ में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्षों से घाटे में चल रही 15 दुग्ध इकाइयां अब मुनाफे में आ चुकी हैं।
डेयरी क्षमता में विस्तार, रोजगार के नए अवसर
प्रदेश में डेयरी क्षमता 48 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 54 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। आगामी दो वर्षों में इसे 70 लाख लीटर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस दिशा में 2,185 नए प्रस्तावित दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति/दुग्ध संकलन केंद्र शुरू किए गए हैं तथा 788 नई रजिस्टर्ड दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन हुआ है। इनके माध्यम से 48,376 नए दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सदस्य जोड़े गए हैं।
श्वेत क्रांति 2.0 के तहत 17 जुलाई 2025 से प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है, जिससे समितियों की स्थापना और संचालन सरल हुआ है।
बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान
पन्नाधाय बाल-गोपाल योजना के तहत राज्य के लगभग 67 हजार राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 12,508 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर की आपूर्ति की गई है।
वहीं, मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना (आंगनबाड़ी दुग्ध वितरण योजना) के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को 2,243 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर उपलब्ध कराया गया है। इस प्रकार कुल 14,751 मैट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
गुणवत्ता पर जोर, 25 हजार सैंपलों की जांच
उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘दूध का दूध, पानी का पानी अभियान’ चलाया गया, जिसके तहत 24,731 से अधिक दूध के सैंपलों की जांच की गई।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार के दो वर्षों में डेयरी क्षेत्र में हुए ये प्रयास न केवल पशुपालकों की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए राजस्थान को डेयरी विकास के नए मुकाम पर ले जा रहे हैं।