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परिजनों से छुपकर सीखा तुलसी माला बनाना…

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

कारोबार से न केवल अपने जीवन को बदला, बल्कि वे आर्थिक रूप से सशक्त हुई

भरतपुर। महिलाएं यदि ठान लें, तो क्या कुछ नहीं कर सकतीं, ऐसे में आज हम आपको ऐसी ही एक भरतपुर की महिला ओमवती के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 23 साल पहले एक एक रुपए के लिए मोहताज थी। उन्होंने परिजनों से छुपकर तुलसी माला बनाना सीखा। तुलसी माला के कारोबार से न केवल अपने जीवन को बदला, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हुई हैं। इस कारोबार ने उन्हें घर बैठे रोजगार प्रदान किया है।ओमवती की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है जिसमें उन्होंने अपने जीवन को बदलने के लिए तुलसी माला बनाने का काम सीखा और आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।


नदबई के बैलारा गांव निवासी महिला ओमवती ने बताया कि उनका बेटा मोनू 23 साल पहले मथुरा के जैत से तुलसी की माला बनाने के काम सीख कर आया था। उसके बाद वह घर से ही काम करने लगा,घर पर रखी मशीन को देख मेरे मन में काम करने की इच्छा हुई मैने बेटे से काम सिखाने की कहा लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया,जब बेटा काम करता था तो में उसे ध्यान से देखती थी और पीछे से मशीन को चलाकर माला बनाना सीखती थी।एक माह में बिना किसी प्रशिक्षण के तुलसी की माला बनाना सीख गई।

लेकिन अब कच्चा माल और औजार की आवश्यकता थी लेकिन पैसा था नहीं तो जैसे तैसे परिजनों से छुपकर औजार और अरहर की लकड़ी मंगाई उनसे पहली माला बनाई और बाजार में जब तैयार माला को बेचा गया तो 400 रुपए मिले।

उन लोगों को देखते ही हमारे मन में और काम के प्रति जिज्ञासा बड़ी क्योंकि हमारी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी हम लोग एक-एक रुपए के लिए तंग थे। उसके बाद हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा दिन रात तुलसी की माला बनाने का काम किया तो अब हम लोग इतने मजबूत हो गए हैं की प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपए कमा रहे हैं।

उनके द्वारा सिर्फ खुद की कहानी नहीं बल्कि अन्य महिलाओं की भी स्थिति में सुधार किया है उनके द्वारा राजस्थान मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश गुजरात हरियाणा महाराष्ट्र उड़ीसा कोलकाता में महिलाओं को संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण दिया है जिससे वह आत्मनिर्भर बनकर अपना जीवन यापन कर सकें। उनके काम को चलते कही संस्था और दिल्ली IIT से भी उन्हें तुलसी माला बनाने की मशीन गिफ्ट दी गई।

वह कच्चा माल उत्तर प्रदेश के मथुरा के जैत गांव से लाते हैं, तुलसी की तीन चार प्रकार की लकड़ी आती है जिनकी कीमत ₹200 से लेकर के 350 होती है 1 किलो तुलसी की लकड़ी से भजन करने की माला 20,गर्दन में डालने वाली 30 से लेकर 80 माला बनकर तैयार होती है।

उन्होंने कहा है कि मेरे घर के आसपास कहीं ऐसी महिला थी जिनके पति शराब पीते थे उन्हें मैं काम सिखाया और आज वह है आत्मनिर्भर बन चुकी है मैं अन्य महिलाओं से भी अपील करना चाहती हूं जो काम करना चाहती है वह बेझिझक मेरे पास आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी सफलता की कहानी लिख सकती है।

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