लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ओडिशा बदल रहा है, निवेश और पर्यटन तक नई तस्वीर
कभी गरीबी और पलायन की तस्वीरों से पहचाना जाता था ओडिशा,
अब महिला समूहों, निवेश, पर्यटन और कनेक्टिविटी पर फोकस
नीरज मेहरा की भुवनेश्वर से रिपोर्ट
भुवनेश्वर। ओडिशा का नाम सामने आते ही कभी गरीबी, आदिवासी इलाकों की बदहाली, पलायन और पिछड़ेपन की तस्वीरें चर्चा में आती थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, उद्योग, पर्यटन और आधारभूत ढांचे को लेकर एक नई तस्वीर सामने आई है।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने बातचीत में राज्य में आए बदलावों को कई अलग-अलग पहलुओं से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का जोर अब केवल गरीबी कम करने पर नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने, रोजगार पैदा करने, निवेश आकर्षित करने और धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन को नई पहचान देने पर है।
हालांकि, राज्य की सभी पुरानी समस्याएं समाप्त हो गई हैं, ऐसा कहना भी जल्दबाजी होगी। ओडिशा सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग, महिला समूहों और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों में प्रगति के साथ आगे की चुनौतियों का भी उल्लेख है।
शादी के नाम पर महिलाओं की खरीद-फरोख्त पर सख्ती
ओडिशा से दूसरे राज्यों में विवाह के नाम पर महिलाओं को ले जाने और मानव तस्करी की शिकायतें अतीत में सामने आती रही हैं। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने बातचीत में कहा कि सरकार ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही है और यदि किसी ओडिशा की बेटी को पैसे के बल पर खरीदकर बाहर ले जाने जैसी स्थिति सामने आती है तो प्रशासन उसे तलाश कर वापस लाने की कार्रवाई करता है।
ओडिशा पुलिस के अनुसार मानव तस्करी से निपटने के लिए राज्य में 37 Integrated Anti-Human Trafficking Units (IAHTU) बनाई गई हैं। इनका काम तस्करी की सूचना जुटाना, बचाव अभियान चलाना तथा पीड़ितों के पुनर्वास में सहायता करना है।
इसलिए इस मुद्दे को केवल महिला सुरक्षा नहीं बल्कि मानव गरिमा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखना होगा।
70 लाख महिलाओं का नेटवर्क बना आर्थिक ताकत
ओडिशा में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा आधार स्वयं सहायता समूह हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार Mission Shakti के तहत 2024-25 तक 6 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से करीब 70 लाख महिलाएं जुड़ी थीं।
यानी महिलाओं को केवल सरकारी सहायता पाने वाला वर्ग मानने की बजाय उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी कड़ी में Subhadra Yojana के तहत 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को पांच वर्षों में कुल ₹50,000 की सहायता का प्रावधान है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता और उत्पादक संपत्ति निर्माण को बढ़ावा देना है।
गरीबी की पुरानी तस्वीर से आगे बढ़ने की कोशिश
उपमुख्यमंत्री ने बातचीत में कालाहांडी जैसे इलाकों से जुड़ी गरीबी की पुरानी छवि का उल्लेख करते हुए कहा कि ओडिशा को अब उसी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
यह बदलाव केवल सरकारी दावे तक सीमित है या वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है—इसका आकलन जिलेवार आय, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी के आंकड़ों से किया जाना जरूरी है।
राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण भी बताता है कि ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था में स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका बढ़ी है। SHG और Joint Liability Group के जरिए छोटे किसानों, भूमिहीन परिवारों और कमजोर वर्गों को वित्तीय संस्थाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
खनिज संपदा से वैल्यू एडिशन तक
ओडिशा लंबे समय से खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। लेकिन अब बहस केवल खनिज निकालने तक सीमित नहीं है। सरकार निवेश के जरिए मैन्युफैक्चरिंग, वैल्यू एडिशन, ग्रीन एनर्जी, रेलवे उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स और क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों को बढ़ाने पर जोर दे रही है।
जून 2026 में राज्य की High-Level Clearance Authority ने नौ जिलों में 20 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्टों को मंजूरी दी। सरकार के अनुसार इन प्रस्तावों में करीब ₹76,612 करोड़ का निवेश और 50,500 से अधिक संभावित रोजगार शामिल हैं।
अगस्त 2026 में दिल्ली-एनसीआर निवेश अभियान के दौरान राज्य सरकार ने ₹66,392 करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 54,135 संभावित रोजगार अवसरों की जानकारी दी। ये निवेश प्रस्ताव हैं, इसलिए इन्हें वास्तविक रूप से सृजित रोजगार के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
गुजरात से लेकर UAE तक निवेश का नया कनेक्शन
निवेश आकर्षित करने के लिए ओडिशा अब राज्य के बाहर भी अभियान चला रहा है। सितंबर 2026 में UAE से राज्य के लिए ₹8,417 करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 14,310 संभावित रोजगार अवसरों की जानकारी राज्य सरकार ने दी।
सरकार का जोर उद्योग के साथ-साथ टेक्सटाइल, MSME, ग्रीन एनर्जी, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग नीतियों के जरिए निवेश का माहौल बनाने पर है।
यही बदलाव ओडिशा की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है—यदि निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और उनमें स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिलता है।
सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी पर जोर
निवेश तभी आता है जब उद्योगों को बाजार, बंदरगाह, रेलवे, एयरपोर्ट और सड़क नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था हो। इसलिए ओडिशा में कनेक्टिविटी को आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा रहा है।
राज्य सरकार ने 2026 में बस परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए ₹3,400 करोड़ की Atal Bus Stand Scheme को मंजूरी दी है।
यह बदलाव केवल बड़े शहरों के लिए नहीं, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
पर्यटन में मंदिरों से आगे की कहानी
उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा ने बातचीत में ओडिशा के पर्यटन की संभावनाओं को धार्मिक स्थलों से लेकर जंगल, प्राकृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों तक विस्तार देने की बात कही।
ओडिशा के पास पुरी और लिंगराज जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के अलावा उदयगिरि-खंडगिरि, कोणार्क और अनेक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल हैं। धार्मिक पर्यटन को केवल दर्शन तक सीमित रखने की बजाय यदि इसे स्थानीय होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड, खान-पान और छोटे कारोबार से जोड़ा जाता है तो यह स्थानीय रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है।
इसी सोच का एक उदाहरण पिपली में प्रस्तावित ₹80 करोड़ का Chandua Handicraft Hub है। राज्य सरकार के अनुसार इससे पिपली और आसपास के 6,000 से अधिक कारीगरों को लाभ पहुंचाने तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल मार्केटिंग और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं से जोड़ने का लक्ष्य है।
जंगल और प्राकृतिक संपदा भी पर्यटन की ताकत
ओडिशा की एक बड़ी ताकत उसका प्राकृतिक भूगोल है। जंगल, समुद्र तट, वन्यजीव, पहाड़, झरने और आदिवासी संस्कृति पर्यटन के अलग-अलग मॉडल तैयार करने की संभावना पैदा करते हैं।
लेकिन यहां विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा। पर्यटन बढ़े, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों पर उसका दबाव नियंत्रित रहे—यही असली चुनौती होगी।
प्राचीन ओडिशा में महिलाओं की भूमिका का नया विमर्श
प्रभाती परिडा ने ओडिशा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में महिलाओं की भूमिका का भी उल्लेख किया। प्राचीन मंदिरों की मूर्तिकला और कला में महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं में चित्रित किया गया है। उन्होंने इसे ओडिशा की सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा में महिला शक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
यह ऐतिहासिक विरासत आज के महिला सशक्तीकरण से जोड़ी जा रही है—जहां महिला केवल परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाली नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधि, उद्यम और सार्वजनिक जीवन की भागीदार भी है।
बीजू पटनायक से नवीन पटनायक
ओडिशा की राजनीति पर बात करते हुए प्रभाती परिडा ने पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता बताया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के लंबे कार्यकाल का अपना राजनीतिक आकलन प्रस्तुत किया।
उन्होंने नवीन पटनायक की शैली को शांत और संयमित बताते हुए यह दावा किया कि उनके कार्यकाल में प्रशासनिक एवं औद्योगिक क्षमता का उतना उपयोग नहीं हुआ, जितना वर्तमान सरकार करना चाहती है।
यह हिस्सा उपमुख्यमंत्री का राजनीतिक आकलन है, जिसे उनके कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नवीन पटनायक और BJD की ओर से इन नीतिगत दावों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं।
सवाल अब यह नहीं कि ओडिशा बदला या नहीं…
ओडिशा की कहानी को केवल गरीबी से समृद्धि तक की सरल कहानी मानना सही नहीं होगा। राज्य ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में कई बदलाव दर्ज किए हैं, वहीं रोजगार की गुणवत्ता, क्षेत्रीय असमानता, आदिवासी क्षेत्रों का विकास, स्वास्थ्य-शिक्षा और निवेश को जमीन पर रोजगार में बदलना जैसी चुनौतियां अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन दिशा में बदलाव साफ दिखाई देता है।
एक तरफ 70 लाख महिलाओं का स्वयं सहायता समूह नेटवर्क है, दूसरी तरफ हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव। एक तरफ पुरी, लिंगराज, कोणार्क और उदयगिरि-खंडगिरि की विरासत है, तो दूसरी तरफ नए उद्योग, कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर।
इसलिए ओडिशा की मौजूदा कहानी को शायद इस सवाल से समझना ज्यादा सही होगा—
“क्या ओडिशा गरीबी की पुरानी पहचान से निकलकर रोजगार, निवेश, पर्यटन और महिला आर्थिक शक्ति वाले नए मॉडल की तरफ बढ़ रहा है?”
इसका अंतिम जवाब आने वाले वर्षों में तब मिलेगा, जब निवेश वास्तविक उद्योगों में बदलेगा, उद्योग स्थानीय युवाओं को रोजगार देंगे और विकास का लाभ भुवनेश्वर-कटक जैसे शहरी केंद्रों से निकलकर राज्य के दूरदराज आदिवासी और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचेगा।















































