लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर (रूपनारायण सांवरिया) | राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना एक बार फिर चर्चा में है। राजस्थान फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि राज्यभर में संचालित अधिकांश पशु चिकित्सा संस्थानों में दवाओं का भंडारण, रखरखाव और वितरण पंजीकृत फार्मासिस्टों के बजाय अन्य कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे दवा गुणवत्ता और पशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार सेन ने कहा कि वर्ष 2012 से संचालित इस योजना में फार्मेसी एक्ट-1948 की भावना के अनुरूप फार्मासिस्टों की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने प्रत्येक पशु चिकित्सा केंद्र पर पंजीकृत फार्मासिस्ट तैनात करने की मांग की।
एसोसिएशन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना पर लगभग 93.54 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। राज्य में दिसंबर 2024 तक 10,837 पशु चिकित्सा संस्थान संचालित थे, जिनके माध्यम से पशुपालकों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जयपुर संभाग अध्यक्ष ओमप्रकाश मीणा ने कहा कि दवा प्रबंधन केवल वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षित भंडारण, एक्सपायरी मॉनिटरिंग, स्टॉक प्रबंधन, डोज निर्धारण और दुष्प्रभावों की जानकारी जैसी तकनीकी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। ऐसे में प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत लगभग 200 प्रकार की दवाएं और 25 प्रकार की सर्जिकल सामग्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। साथ ही करीब 5 करोड़ पशुओं के उपचार और 1.40 करोड़ पशुपालकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने मांग की है कि पशुपालन विभाग के अंतर्गत संचालित सभी औषधि भंडारों और दवा वितरण केंद्रों पर फार्मासिस्टों के पद सृजित कर नियमित नियुक्तियां की जाएं, ताकि योजना का संचालन अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से हो सके।
संगठन का कहना है कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है, इसलिए पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी दवा व्यवस्था में तकनीकी विशेषज्ञता सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।