नेपाल में सत्ता का संकट बरकरार: बालेंद्र शाह, सुशीला कार्की और कुलमान घिसिंग के नाम प्रधानमंत्री की दौड़ में?

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नेपाल में सत्ता संकट: ओली के इस्तीफे के बाद नया प्रधानमंत्री कौन?

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

नीरज मेहरा वरिष्ठ पत्रकार

काठमांडू। नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद सत्ता का रिक्त स्थान बना हुआ है। अभी तक नए प्रधानमंत्री की ताजपोशी नहीं हो पाई है और पूरे देश की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

ओली सरकार को सोशल मीडिया बैन और कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। “Gen Z आंदोलन” के नाम से उठे युवा विरोध प्रदर्शनों ने देशभर में जबरदस्त दबाव बनाया। हिंसक झड़पों और जनाक्रोश के बीच ओली ने इस्तीफा सौंप दिया।

कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री?

अंतरिम सरकार बनाने को लेकर कई नाम चर्चा में हैं —

सुशिला कार्की : नेपाल की पहली महिला चीफ़ जस्टिस रह चुकीं कार्की को उनकी ईमानदार छवि और निष्पक्षता के कारण युवाओं का समर्थन मिल रहा है।

कुलमान घिसिंग : नेपाल बिजली प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख, जिन्होंने देश से “लोड-शेडिंग” खत्म कर इतिहास रचा था। तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता की वजह से उन्हें भी दावेदार माना जा रहा है।

बालेंद्र शाह (बालेन शाह) : काठमांडू के मेयर और युवा चेहरे के तौर पर लोकप्रिय। हालांकि फिलहाल वे इस पद के लिए अनिच्छुक बताए जा रहे हैं।

हर्का राज सम्पांग राय : धरान के मेयर और भ्रष्टाचार विरोधी छवि वाले नेता, जिनका नाम भी विकल्पों में शामिल है।

संवैधानिक पेच

नेपाल के संविधान में “अंतरिम सरकार” को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यही कारण है कि राष्ट्रपति, सेना और आंदोलनकारी समूहों के बीच लगातार बातचीत चल रही है ताकि कोई वैधानिक रास्ता निकाला जा सके।

आगे क्या?

फिलहाल देश में राजनीतिक सस्पेंस बरकरार है। सेना और राष्ट्रपति कार्यालय आंदोलनकारी युवाओं से चर्चा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कोई ऐसा नाम तय किया जाएगा, जिस पर जनता और राजनीतिक दलों, दोनों की सहमति बन सके। इनमें जैन जीत की पहली पसंद बालेंद्र शाह है जो काठमांडू के मेयर है  शाह के समर्थन में बड़ी संख्या में  यूथ है। बताया जाता है कि भारत की तर्ज पर बालेंद्र शाह ने ही सबसे पहले विद्रोह का नारा लगाया था ओली गद्दी छोड़ का नारा दिया था बताया जा रहा है कि अधिकांश लोग नेपाल में हिंदू राष्ट्र के विरोधी है जबकि कुछ लोग राजशाही चाहते हैं कुछ लोग प्रकृति  पूजक की बात कर रहे हैं। एक-दो दिन में स्पष्ट हो जाएगा कि कौन नेपाल का प्रधानमंत्री होगा क्योंकि जो तीनों नाम लिए गए हैं वह तीनों ही काफी समझदार है और बालेंद्र शाह का नाम युवा और साफ-सफाई के कारण चर्चा में है उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर काठमांडू की जो दशा बद्री है लोगों को लगता है कि यदि इन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो पूरे देश को भ्रष्टाचार मुक्त करके यह देश को विकसित राष्ट्र में बनाएंगे साथ में इनमें दूसरे राष्ट्र अध्यक्षों से आंख में आंख डालकर बात करने की क्षमता है। नेपाल में मोदी जी का भी नारा लगा रहा है नेपाल के लोगों को उम्मीद है कि अब उन्हें भी मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिलने वाला है। कई लोग ने मोदी की तर्ज पर भी नारेबाजी करते हुए मोदी की तारीफ करके माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं हां की बहुत से लोग इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देना है।

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