नेपाल में राजनीतिक संकट:
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
ओली का इस्तीफा हो चुका है।
नया प्रधानमंत्री अभी तय नहीं हुआ है।
सेना ने हालात काबू में करने के लिए कर्फ्यू लगाया है।
काठमांडू। नेपाल इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जब देशभर में भड़के युवा प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है और राजधानी काठमांडू समेत कई इलाकों में सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा है।
राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार किया
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति की कवायद शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। फिलहाल ओली एक caretaker प्रधानमंत्री के तौर पर सीमित अधिकारों के साथ कार्य कर रहे हैं।
बालेंदु शाह और सुशीला कार्की का नाम आगे
राजनीतिक हलकों और प्रदर्शनकारी युवाओं की ओर से पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सामने आ रहा है। कार्की को तटस्थ और साफ-सुथरी छवि वाली नेता माना जाता है। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसी तरह बालेंद्र शाह का नाम भी काफी आगे चल रहा है युवाओं की पसंद बताई जा रहे हैं बालेंद्र शाह।
सेना ने संभाली राजधानी की कमान
बढ़ती हिंसा और तनाव को देखते हुए नेपाल सरकार ने सेना को मैदान में उतारा है। राजधानी काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और सेना सड़कों पर गश्त कर रही है। सेना प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है।
जनता की नाराज़गी
युवा वर्ग इस आंदोलन की अगुवाई कर रहा है। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदी जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। राजनीतिक अस्थिरता के चलते नेपाल का भविष्य फिलहाल अनिश्चित नज़र आ रहा है।