लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ/भोपाल | नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता (राजस्थान)
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े भूमि विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा पलटवार किया है, जिससे यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
अखिलेश यादव का आरोप
अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद को भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक रणनीति बताते हुए दावा किया कि पार्टी नेतृत्व उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाकर उत्तर प्रदेश में भी नेतृत्व परिवर्तन की जमीन तैयार की जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री मोहन यादव का रियल एस्टेट कारोबार से संबंध पहले से ज्ञात था तो भाजपा अब तक इस मुद्दे पर मौन क्यों रही।
ओम प्रकाश राजभर का पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उन्हें निशाने पर लिया। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस मामले में इसलिए सक्रिय हैं क्योंकि इसका असर उनके करीबियों और सैफई परिवार से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है।
राजभर ने मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कोषाध्यक्ष चंद्रपाल यादव से पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी प्रभाव के जरिए मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर निवेश किया गया था।
बेनामी निवेश को लेकर लगाए आरोप
राजभर ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में जमीन और निवेश से जुड़े मामलों में संकट आने के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओं में बेचैनी दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि विवादित निवेश पर कार्रवाई की आशंका के चलते अखिलेश यादव इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति
मध्य प्रदेश के भूमि विवाद को लेकर शुरू हुई बहस अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी तेज हो गई है। एक ओर अखिलेश यादव भाजपा की आंतरिक राजनीति का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं पर बेनामी निवेश से जुड़े गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक दावों पर कायम हैं।













































