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मवेशी तस्करी पर बंगाल में सियासी बवाल

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 BJP विधायक ने मांगा ‘गाय का जन्म प्रमाण पत्र’

कोलकाता। नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता (राजस्थान) पश्चिम बंगाल में मवेशी तस्करी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हिंगलगंज इलाके में मवेशियों के कथित अवैध परिवहन को रोकने के दौरान भाजपा विधायक रेखा पात्रा के एक बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विधायक ने मवेशियों को ले जा रहे लोगों से ‘गाय का जन्म प्रमाण पत्र’ दिखाने की मांग कर दी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार हिंगलगंज के लेबुखाली क्षेत्र में भाजपा विधायक रेखा पात्रा ने मवेशियों से भरे एक वाहन को रुकवाया। इसके बाद उन्होंने गायों को वाहन से उतरवाकर उनके लिए चारे और पानी की व्यवस्था करवाई।

हालांकि विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक ने कहा कि राज्य में लागू नियमों के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के गोवंश के वध पर प्रतिबंध है। ऐसे में मवेशियों को ले जाने वालों को यह साबित करना होगा कि पशुओं की उम्र 14 वर्ष से अधिक है।

इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर ‘गायों का बर्थ सर्टिफिकेट’ दिखाने की मांग की और चेतावनी दी कि दस्तावेज नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

TMC ने साधा निशाना

विवाद बढ़ने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा विधायक के बयान पर तीखा पलटवार किया।

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा विधायक किसी भी “डबल इंजन” भाजपा शासित राज्य से गाय का ऐसा जन्म प्रमाण पत्र दिखाकर बताएं कि आखिर यह जारी कौन करता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान व्यावहारिक नहीं हैं और केवल राजनीतिक विवाद पैदा कर रहे हैं।

क्या वास्तव में होता है ‘बर्थ सर्टिफिकेट’?

पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मवेशियों की पहचान और रिकॉर्ड के लिए ‘इयर टैगिंग’ और पशु पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके तहत पशुओं के कानों में टैग लगाया जाता है और उनका स्वास्थ्य एवं पहचान संबंधी रिकॉर्ड रखा जाता है।

हालांकि इंसानों की तरह मवेशियों के लिए सामान्य रूप से कोई आधिकारिक “जन्म प्रमाण पत्र” जारी करने की व्यवस्था नहीं होती।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक वर्ग इसे मवेशी तस्करी के खिलाफ सख्त रुख बता रहा है, जबकि दूसरे लोग इसे अव्यावहारिक और हास्यास्पद करार दे रहे हैं।

फिलहाल यह मामला बंगाल की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है और भाजपा तथा टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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