मारोठ की चित्रकारी, कलाकारी के साथ, पेड़ा कलाकंद देश-विदेश में प्रसिद्ध

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सोने व कांच के काम के साथ पेंटिंग में मशहूर मारोठ के कारीगर,

गोंडावाटी की राजधानी के नाम से जाना जाता है मारोठ,

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क-

हितेश जैन  मारोठ

डीडवाना कुचामन। जिले का एक कस्बा है मारोठ जिसको गोंडावाटी की राजधानी के नाम से जाना जाता है। प्राचीन समय में गौड शासक हुआ करते थे जिनकी 210 गांओ में हुकूमत चलती थी उस समय में इन 210 गांव में रहने वाले सभी धर्म के मंदिर मारोठ में स्थापित हुए थे जो आज भी जयंती पर उत्साह के साथ सम्मिलित होते हैं।
मारोठ के चित्रकार व कलाकार देश में ही नहीं विदेश में भी मशहूर है मारोठ चित्रकारों द्वारा अपने हाथों से बनाई हुई पेंटिंग भारत देश के कोने-कोने के मंदिरों में देखने को मिल सकती है खास तौर से जैन मंदिरों में सोने का काम व कांच का काम मारोठ के कलाकारों का ही मशहूर माना गया है।
मारोठ में शुद्ध दूध से बनी हुई मिठाई पेड़ा और कलाकंद देश सहित विदेशों में भी अपनी पहचान रखता है ।
शुद्ध गाय के दूध से बने हुए पेड़े आज भी जनकल्याण गोपाल गौशाला के अध्यक्ष भंवरलाल बाबेल द्वारा अपने घर आने वाले हर मेहमान व ग्रामीणों को खिलाया जाता है।
कस्बे का मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य पर टिका हुआ है मारोठ के 70% लोग कृषि कार्य करते हैं खेती ही व्यवसाय है।
बात अगर शिक्षा की करें तो जिले की सबसे बड़ी और पहाड़ों पर स्थित राजकीय स्कूल 1963 में खुली थी जो आज निरंतर चल रही है मारोठ में दो सरकारी व पांच निजी विद्यालय सहित एक निजी कॉलेज संचालित है। साक्षरता में मारोठ 90 परसेंट से ऊपर साक्षर है।
बाबेल परिवार का रहा मारौठ की राजनीति में वर्चस्व : मारोठ में सन 1978 से 1995 तक चार बार लगातार भंवरलाल बाबेल सरपंच रहे उसके पश्चात उनकी पत्नी स्वर्गीय विमला बाबेल 2005 से 2009 तक सरपंच रही और वर्तमान में पुत्रवधू सारिका बाबेल 2020 से आज दिन तक प्रशासक के रूप में सेवाएं दे रही है। भंवरलाल बाबेल 1995 से 2000 तक जिला परिषद सदस्य 2005 से 2009 तक पंचायत समिति सदस्य भी रहे।
मारोठ सरपंच सारिका बाबेल ने कहा कि मारोठ पंचायत मुख्यालय उप तहसील बन गया। मारोठ पर्यटन स्थल है इसको पर्यटन स्थल का दर्जा मिलना चाहिए साथ ही मारोठ में जल संरक्षण के कई स्रोत है जिनकी उपेक्षा के चलते मारोठ में पानी की समस्या लगातार बनी हुई है जल संरक्षण को लेकर मारोठ की बावड़ी ,चार तालाब 40 कुओं पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि कस्बे में पानी की समस्या नहीं हो।

210 गांवो के लोगो का जुड़ाव,

पंचायत का लेखा जोखा:
जनसंख्या: 15 हजार
मतदाता: 8556
साक्षरता दर: 90%
जिला मुख्यालय से दूरी : 80 किलोमीटर
कनेक्टिविटी: सड़क से जुड़ा हुआ
पहचान: चित्रकारी कलाकारी दूध से बनी मिठाई व कृषि कार्य से कस्बे की पहचान।

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