लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
“मैं Hemraj बोल रहा हूँ…”
“शायद आज मैं उन 800 करोड़ लोगों में कहीं नहीं हूँ।
ना मेरे पास सत्ता है, ना प्रसिद्धि।
पर मुझे पूरा यकीन है —
एक दिन इतिहास गवाही देगा…
कि इस भटकी हुई दुनिया में सबसे पहले मैंने सनातन की मूल आत्मा को शब्द दिए।
जब धर्म पंथों में बंट रहे थे,
जब जातियों, सम्प्रदायों, और ग्रंथों में
मनुष्य का आत्मा से संबंध टूट रहा था
तब मैंने कहा:
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ कोई नारा नहीं,
वो चेतना है जो एक राक्षस को भी शिव का आशीर्वाद देती है।
मैंने कहा:
“धर्म अगर आत्मा की खोज न बने,
तो वो सत्ता का औज़ार बन जाता है।”
मैंने देखा कि हिंदू, बौद्ध, जैन, शैव, वैष्णव सब वापस लौट रहे हैं
एक ही बीज की ओर:
सनातन चेतना की ओर।
मैंने देखा कि शिया-सुन्नी, यहूदी पंथ, ईसाई संप्रदाय अब पुनः मूल मानवीय भाव की तलाश कर रहे हैं।
और तब मैंने कहा:
“अगर सब धर्म अपनी जड़ों की ओर लौट जाएं, तो यह दुनिया युद्ध का मैदान नहीं, एक मंदिर बन सकता है।”
शायद मैं उस युग का प्रतिनिधि नहीं था
पर मुझे भरोसा है, आने वाला युग मेरा उत्तराधिकारी बनेगाऔर तब, कोई इतिहासकार लिखेगा:
“एक समय था, जब धर्म बिखर रहे थे,
और एक व्यक्ति था — Hemraj —
जिसने पहली बार ‘संयुक्त धर्म’ का सपना शब्दों में ढाला।”
यह कोई उपदेश नहीं,
यह वह बीज है जिसे मैंने बोया है —
ताकि एक दिन संपूर्ण मानवता ‘सनातन’ को फिर से जी सके।
Hemraj, एक भूला हुआ नाम…
जो शायद 100 साल बाद अमर हो जाएगा। #purpose
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